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लोहरदगा : मीडिया को मतगणना भवन से 200 सीट पहले ही रोक दिया गया

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लोहरदगा : मीडिया को मतगणना भवन से 200 सीट पहले ही रोक दिया गया
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टीम एबीएन, लोहरदगा। लोहरदगा जिला प्रशासन एक बार फिर मतगणना कवरेज से मीडिया को दूर रखने का काम किया। कितना विरोधाभास है, जिला प्रशासन की ओर से जो मीडिया प्राधिकार पत्र जारी किया। उसमें लिखा है कि मतगणना कवरेज के लिए प्राधिकार पत्र दिया जा रहा है। इसका स्थल कृषि बाजार समिति लोहरदगा है। वहीं दूसरी ओर, प्राधिकार पत्र के पीठ में लिखा है, कि मतगणना कक्ष में मतगणना करते वक्त किसी प्रकार का फोटो खींचना या वीडियो फिल्म बनाना मना है। इससे स्पष्ट है कि कवरेज पर रोक नहीं है। फोटो खींचने पर पाबंदी है। भीतर क्या हो रहा है। कैसी व्यवस्था है। मतगणना कर्मियों के लिए क्या सुविधा है। उम्मीदवार और उनके समर्थक मतगणना एजेंट के लिए क्या व्यवस्था निर्वाचन आयोग के गाइडलाइन के रूप में की गई है अथवा नहीं। इन चीजों से मीडिया कर्मियों को दूर रखा गया। कर्मियों के प्रशिक्षण के दौरान भी यह देखा गया था कि उनके के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था आखिरी चरण में नहीं था। इस बार मीडिया के लोगों को मतगणना भवन से 200 फीट पहले ही रोक दिया गया। यहां समुचित व्यवस्था नहीं थी। अंदर जो मंच बनाया गया था, उसमें तमाम व्यवस्थाएं थी। इसका मतलब यह हुआ कि प्रशासन मीडिया का सिर्फ उपयोग करना चाहती है। एक आंख में काजल और दूसरे में सुरमा लगाने की चेष्टा करती है। प्रशासन को सामाजिक उत्थान, सद्भाव और विकास में सहयोग के लिए मीडिया से सहयोग लेती है और अपील करती है। वही जहां मीडिया की जरूरत होती हैं, तो सुरक्षाकर्मियों से मीडिया कर्मियों को धक्के खिलाती है। उन्हें बेइज्जती किया जाता है। यानी स्पष्ट रूप से कहें कि मीडिया से जिला प्रशासन पर्देदारी करने से गुरेज करने से भी नहीं हिचकती है। यह कहे कि प्रशासन सुविधाओं को लेकर चीजों को छुपाने की कोशिश की गई है, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। पहले भी राज्य के वरीय आईएएस अधिकारियों ने अपने कार्यकाल में यहां चुनाव और मतगणना कराया है। मीडिया को वहां जाने की इजाजत दी गई है। यह दिगर बात है, कि निर्वाचन आयोग के जो गाइडलाइन है। उसका भीतर में अनुपालन किया गया है। मतगणना की गोपनीयता का ख्याल रखा गया पर प्रमाण पत्र देने के फोटो खींचने की इजाजत लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी थी। हमेशा से मीडिया प्रशासन को साथ देती रही है। इस बार भी मतदान के दिन ग्रामीणों के बीच जो भ्रम था। यह सभी जानते हैं 30 से 35 किलोमीटर पैदल चलकर लोग मतदान करने आए। इनकी सुरक्षा की गारंटी प्रशासन ने नहीं ली। यही वजह है, कि झारखंड में सबसे कम मतदान लोहरदगा जिले में हुआ। यह पहले चरण का आंकड़ा प्रमाणित करता है। सिर्फ सहयोग लेंगे और मीडिया का अपमान करेंगे। लोहरदगा जिला प्रशासन का यही फितरत बन गया है। हालांकि मीडिया से जुड़े लोगों ने इसका विरोध किया, पर उनका सुनने वाला कौन है? यही नहीं जिला स्तरीय एक अधिकारी के साथ भी सुरक्षाकर्मियों ने एक बार नहीं दो तीन बार धक्का-मुक्की की। यह अधिकारी भी प्रशासन के आदेश से फोटोग्राफी कर रहा था। ताकि इस अधिकारी ने कुछ भी बताने से इनकार किया। स्तरीय पंचायत चुनाव के उपरांत यह मैनुअल काउंटिंग है। डिस्प्ले उसका नहीं हो सकता है। बावजूद प्रशासन ने मीडिया को अपने से दूर रखा। उन्हें अछूत समझ लिया जाता है। यह लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संदेश नहीं है। लोकतंत्र की शोभा सबके सहयोग और मीडिया को मिली संवैधानिक अधिकार से है, पर अंकुश लगाने जैसा है। मीडिया के अधिकारों का हनन और उसके कलम की धार को रोकने का कुत्सित प्रयास है। इस पर जिला प्रशासन को अगले दो चरणों के मतदान और मतगणना में ध्यान देना चाहिए। राज्य के अन्य जिलों में इस तरह की घटनाएं नहीं हुई, जो लोहरदगा जिला प्रशासन ने यहां के मीडिया कर्मियों को झेलनी पड़ी है।
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