टीम एबीएन, रांची। वैश्विक शांति, पर्यावरण संरक्षण एवं आर्य भाव को संवर्धित एवं संपुष्टित करने के उद्देश्य से एस आर डीएवी पब्लिक स्कूल पुंदाग में वैदिक हवन सह चेतना शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें रांची महानगर के सभी डीएवी विद्यालयों यथा डीएवी कपिलदेव, डीएवी निरजा सहाय, डीएवी गांधीनगर, डीएवी बरियातू, डीएवी पुंदाग, डीएवी हेहल के अतिरिक्त डीएवी गिद्दी, डीएवी खूंटी के तकरीबन 150 शिक्षक- शिक्षिकाओं के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
इस महायज्ञ कार्यक्रम में एमके सिन्हा सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी झारखंड प्रक्षेत्र एफ, मनोज कुमार सिन्हा जी सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी झारखंड प्रक्षेत्र बी, एसके सिन्हा प्राचार्य डीएवी गांधी नगर, टीपी झा प्राचार्य डीएवी खूंटी, वीके पांडेय प्राचार्य डीएवी बरियातू एमके मिश्रा अवकाश प्राप्त प्रिंसिपल डीएवी भरेच नगर, श्री एनके कर प्राचार्य डीएवी भरेच नगर, आरके सिंह प्राचार्य डीएवी गिद्दी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। हवन और यज्ञ प्रार्थना के उपरांत प्राचार्य संजय कुमार मिश्रा ने सभी गणमान्य अतिथियों के साथ - साथ विभिन्न डीएवी विद्यालयों से पधारे प्राचार्य और शिक्षकगण का औपचारिक स्वागत किया। उन्होंने डीएवी प्रबंधन समिति के प्रधान आर्य रत्न पद्मश्री डॉ पूनम सूरी तथा डीएवी पब्लिक स्कूल्स - 1 के निदेशक डॉ जेपी शूर जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डीएवी संस्था का मूल उद्देश्य आधुनिक शिक्षा प्रदान करने के साथ वैदिक मूल्यों को संपुष्टित एवं संवर्धित करना भी है। हम इस प्रकार की गतिविधियों का आयोजन करेंगे, जिनसे विद्यार्थियों का चारित्रिक विकास हो। वैदिक चेतना जागृत करने का यह सिलसिला जारी रहेगा।
डीएवी झारखंड जोन एफ के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी एमके सिन्हा ने अपने उद्बोधन में कहा कि डीएवी प्रबंधन समिति के प्रधान आर्य रत्न पद्मश्री डॉ पूनम सूरी तथा डीएवी पब्लिक स्कूल्स - 1 के निदेशक डॉ जेपी शूरजी के कुशल नेतृत्व में डीएवी विद्यालयों के विद्यार्थियों में साप्ताहिक हवन के माध्यम से वैदिक जागृति उत्पन्न करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे विद्यार्थी सुशिक्षित होने के साथ - साथ सुसंस्कृत भी होंगे। हम सबको महर्षि दयानंद के आदर्शों का अनुपालन करना चाहिए। हम सब को डीएवी का सिपाही बन कर अपनी संस्कृति की उन्नति में भागीदारी निभानी है। हम खुद आर्य बनने के साथ-साथ दूसरों को भी आर्य अर्थात श्रेष्ठ बनाएं।
डीएवी झारखंड जोन बी के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी एमके सिन्हा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि परमात्मा से साक्षात्कार का साधन हवन है। हमें वेदों की ओर लौटना होगा। ज्ञान के प्रकाश से अज्ञानता के अंधकार को दूर करना होगा। डीएवी भरेच नगर के अवकाश प्राप्त प्राचार्य एमके मिश्रा ने अपने उद्बोधन में कहा कि सनातन वैदिक धर्म एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी रखता है। हवन से वातावरण की शुद्धि होती है, इसका सकारात्मक प्रभाव नई ऊर्जा का संचार करता है। ज्ञान के साथ संस्कार का भी महत्त्व है।
तत्पश्चात विद्यालय की संगीत मंडली ने सुखी बसे संसार सब तथा ओऊम कहने से तर जाएगा... भजन प्रस्तुत कर सबको मंत्र मुग्ध कर दिया।कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ हुआ।