टीम एबीएन, कोडरमा। अक्षय तृतीया पर 50 वर्ष बाद ग्रहों का अद्भुत संयोग बना है जो अति शुभ फलदाई है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि इस बार 3 मई को मंगल रोहिणी नक्षत्र में शोभन योग और वृषभ राशि के चंद्रमा के साथ में मनाया जाएगा। उक्त बातें मां तारा ज्योतिष संस्थान के आचार्य अनिल मिश्रा ने कही। उन्होंने कहा कि शुक्र के अपनी उच्च राशि में होने से मालव्य राजयोग, गुरु के मीन राशि में होने से हंस राजयोग और शनि के अपने घर में विद्यमान होने से शश राजयोग बन रहा है। वहीं, बड़े पैमाने पर खरीदारी भी होगी। शादी विवाह, यज्ञोपवित संस्कार भी होगा। भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चार ग्रहों का अनुकूल स्थिति में होना अपने आप में बहुत ही खास है। ऐसी स्थिति 50 वर्ष बाद बनी है। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं राजयोग के अलावा मंगल रोहिणी का दुर्लभ संयोग भी 30 साल बाद बना है। शुभ संयोग और ग्रहों की विशेष स्थिति में अक्षय तृतीया पर दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन जल से भरे कलश पर फल रखकर दान करना, लक्ष्मी-नारायण अभिषेक, भंडारे कराना एवं आभूषणों की खरीदारी करना बहुत ही शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान विष्णु के छठें अवतार माने जाने वाले भगवान परशुराम जी का जन्म महर्षि जमदग्नि और माता रेनुका के घर हुआ था। इस दिन भगवान परशुराम की पूजा भी की जाती है। इस बार अक्षय तृतीया अध्यात्मिक, व्यवसायिक और शुभ कार्यों के लिए बहुत ही शुभ एवं लाभदायक होगा।