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अस्थमा के इलाज में सही तरीके से इनहेलर लेना जरूरी : डॉ देबदत्ता

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अस्थमा के इलाज में सही तरीके से इनहेलर लेना जरूरी : डॉ देबदत्ता
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टीम एबीएन, रांची। अस्थमा के इलाज में इनहेलर बेहद कारगर है। इससे दवा सीधे फेफड़े तक चली जाती है। जिससे दवा ज्यादा असरकारक होती और मरीज को तेजी से लाभ मिलता है। अस्थमा के इलाज में इनहेलर को लेकर अब भी समाज में बहुत सी गलतफहमियां हैं। बहुत से मरीज गलत तरीके से इनहेलर लेते हैं। ऐसे में इसका सही से लाभ मिल नहीं पाता। इनहेलर सही तरीके से लेना जरूरी है। ये बातें विश्व अस्थमा दिवस की पूर्व संध्या पर मेदांता अस्पताल रांची की सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ देबदत्ता बंदोपाध्याय ने कही। उन्होंने कहा कि समाज में अस्थमा को लेकर आज भी जागरूकता की कमी है। अस्थमा के सभी आयु वर्ग के मरीजों को इनहेलर दिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अस्थमा के कई कारण हैं। अगर किसी व्यक्ति के परिवार में माता-पिता, दादा-नाना आदि किसी को अस्थमा है तो उस व्यक्ति को भी यह होने की संभावना रहती है। अस्थमा के मरीजों को अगर किसी खास तरह की चीज़ से एलर्जी है तो उससे दूर रहना चाहिए। इसके मरीजों को अक्सर किसी खास तरह के कपड़े से, धूल, धुआं से एलर्जी होती है और उनमें छाती की जकड़न, खांसी, सर्दी ज़ुकाम हो जाती है। ऐसे में इनसे दूरी बनाकर रहें। मरीजों को एलर्जी से जुड़ी इन चीजों की एक डायरी बनाकर रखनी चाहिए। डॉ देवदत्ता ने बताया कि अस्थमा के मरीजों का मेदांता अस्पताल रांची में ट्रीटमेंट एक्शन प्लान बनाकर होता है। उन्होंने बताया कि अस्थमा के मरीजों को कोविड से सचेत रहने की ख़ासतौर से जरूरत है। अगर उनका अस्थमा अनियंत्रित है तो उस स्थिति में कोविड होने पर उन्हें खतरा हो सकता है। इसलिए अस्थमा को नियंत्रित रखें। मरीज नियमित रूप से अपनी दवा लें , व्यायाम और योग करें इससे उन्हें काफी लाभ होगा। उन्होंने बताया कि मेदांता अस्पताल रांची में अस्थमा के बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
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