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बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मलेरिया से ज्यादा खतरा : डॉ गगनजोत कौर

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बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मलेरिया से ज्यादा खतरा : डॉ गगनजोत कौर
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टीम एबीएन, रांची। मलेरिया में मृत्यु दर काफी कम होती है, इसके मरीज इलाज मिलने पर जल्दी ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मलेरिया से बचाने की ख़ासतौर से जरूरत है। इन्हें मलेरिया होने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। मलेरिया एक संक्रामक रोग है जो मानव शरीर में विभिन्न प्रकार के प्लास्मोडियम परजीवी के कारण होता है। मलेरिया के इस परजीवी का वाहक मादा एनफ्लीज मच्छर है। ये मच्छर के जरिए मानव शरीर में प्रवेश करता है। इसके बाद मलेरिया के लक्षण शरीर में दिखने लगते हैं। ये बातें विश्व मलेरिया दिवस पर मेदांता अस्पताल रांची में इंटर्नल मेडिसिन की डॉ गगनजोत ने कही है। मलेरिया के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, पेट में दर्द, जाड़ा लगना, उल्टी आना जैसे लक्षण सामने आते हैं। सामान्य तौर पर तीन से सात दिन के इलाज के बाद मरीज ठीक हो जाते हैं। मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरों पर नियंत्रण जरूरी : डॉ गगनजोत कौर कहती हैं कि मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरों पर नियंत्रण जरूरी है। मलेरिया फैलने की चेन को तोड़ दिया जाए तो इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके वाहक मच्छरों को पनपने ही नहीं दें। घर के आसपास पानी जमा नहीं होने दें। पूरी बांह के शर्ट पहनें। मच्छरदानी का प्रयोग करें। मलेरिया का मौसम आने वाला है ऐसे में सावधान रहने की जरूरत है। झारखंड में मलेरिया के केस ज्यादा आने का कारण है कि इसका वाहक मच्छर साफ पानी में पनपता है, झारखंड की जलवायु और मौसम इसके अनुकूल है। मेदांता अस्पताल रांची मलेरिया का इलाज करने के साथ ही इसको लेकर जन-जागरूकता के लिए भी काम करता है। मलेरिया के इलाज में अब आ गयी हैं नई दवाएं : वे बताती हैं कि मलेरिया के इलाज में अब नई दवाएं आ गयी हैं। ऐसा इसलिए कि इसके परजीवी पुरानी दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बना लेते हैं। मलेरिया की वैक्सीन के लिए काम चल रहा है। आने वाले समय में हम उम्मीद कर सकते हैं इसकी वैक्सीन भी उपलब्ध हो सकती है। डॉ गगनजोत कौर बताती हैं कि मेदांता अस्पताल रांची में मलेरिया के गंभीर मरीजों का बेहतर इलाज उपलब्ध है। यहां अनुभवी चिकित्सकों की टीम मरीजों का इलाज करती है।
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