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आॅफिस आॅफ प्रॉफिट पर राजनीति गरमाई, चुनाव आयोग की चिठ्ठी पर मचा घमासान

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आॅफिस आॅफ प्रॉफिट पर राजनीति गरमाई, चुनाव आयोग की चिठ्ठी पर मचा घमासान
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टीम एबीएन, रांची। सीएम हेमंत सोरेन पर आॅफिस आॅफ प्रॉफिट का आरोप के बीच भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा मुख्य सचिव को भेजी गई चिठ्ठी ने इन दिनों खलबली है। राज्य सचिवालय से लेकर सियासी गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है। सीएम पर आरोप को लेकर कयासों और अटकलों का बाजार गर्म है। झारखंड में राजनीति हलकों में मौजूदा सरकार को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है और लोग इसे अपने अपने ढंग से व्याख्या करने में जुटे हैं। इन सबके बीच चुनाव आयोग के पत्र का जवाब तैयार करने में मुख्य सचिव कार्यालय जुटा हुआ है। संभावना यह है कि मंगलवार तक भारत निर्वाचन आयोग को सरकार की ओर से जवाब भेजा जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर अनगड़ा पत्थर खदान लीज मामले में राजभवन द्वारा भेजे गये दस्तावेज के बारे में जवाब मांगा है। पूर्व सीएम रघुवर दास के नेतृत्व में 12 फरवरी को राज्यपाल रमेश बैस से मिलकर भाजपा नेताओं का एक शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके भाई बसंत सोरेन पर पत्थर के कारोबार में शामिल होने का आरोप लगाया और उन्हें बर्खास्त कर आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की थी। राज्यपाल रमेश बैस को ज्ञापन सौंपते हुए भाजपा शिष्टमंडल ने हेमंत सोरेन पर मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए अपने नाम से रांची के अनगड़ा मौजा थाना नंबर 26, खाता नंबर 187 प्लॉट नंबर 482 में पत्थर खनन पट्टा की स्वीकृति लेने का आरोप लगाया था। इस बीच चुनाव आयोग की चिठ्ठी को लेकर प्रदेश में सियासी घमासान जारी है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के नेता सीधे तौर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13 (1) ऊ के तहत आपराधिक कृत्य करने का आरोप लगाते हुए कारवाई करने की मांग कर रहे हैं। पूर्व विधायक और भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने कहा है कि जब जरूरत आपकी लालच बन जाए तो यही परिणाम होता है। संभवत: देश का यह पहला उदाहरण है जब एक मुख्यमंत्री ने खुद अपने नाम पर पत्थर खदान अपने नाम पर लीज में ले ली हो, जबकि वो खुद उस विभाग के मंत्री भी हैं। इस वजह से हेमंत सरकार पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के इस कार्य से ना केवल पिपुल्स रिपेंजेटेशन एक्ट का उल्लंघन हुआ है बल्कि झारखंड की छवि को भी बदनाम हुआ है। इधर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर लग रहे आरोप का बचाव करते हुए संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने सरकार पर कोई खतरा होने से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि यह भाजपा द्वारा फैलाया जा रहा प्रोपेगेंडा है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायालय और चुनाव आयोग पर पूरा भरोसा है जो भी फैसला होगा उसका पालन किया जाएगा।
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