टीम एबीएन, रांची। झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद केंद्रीय मंत्रियों के दौरा ने सूबे का राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है। सत्ताधारी दल झामुमो, कांग्रेस और राजद ने इस बावत राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। वहीं मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने केंद्रीय मंत्रियों के दौरा पर आपत्ति को हास्यास्पद बताया है। झारखंड में चार चरणों में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव भले ही दलीय आधार पर नहीं हो रहे हो, पर सूबे में अगले कुछ दिनों के अंदर केंद्रीय मंत्रियों के दौरा ने सत्ता पक्ष और विपक्ष को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। राज्य की सत्ताधारी पार्टियां झामुमो, कांग्रेस और राजद ने केंद्रीय मंत्रियों के दौरा को रद्द करने को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष संयुक्त रूप से शिकायत दर्ज कराई है। दरअसल, झारखंड के 19 आकांक्षी जिलों में चल रही योजनाओं की समीक्षा को लेकर केंद्रीय मंत्रियों का दौरा तय हुआ है। केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला, राज कुमार रंजन सिंह, अन्नपूर्णा देवी सहित कई केंद्रीय मंत्रियों के नाम शामिल हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन का ये आरोप है कि जब राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू है तब SHG ग्रुप के साथ बैठक, कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कहीं से भी सही नहीं है। ये पूरी तरह से पंचायत चुनाव को प्रभावित करना है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सत्ताधारी दलों के इस विरोध को हास्यास्पद बताया है। और कहा कि केंद्रीय मंत्री का दौरा आकांक्षी जिलों में चल रही योजनाओं की समीक्षा को लेकर है। इस दौरे से पंचायत चुनाव प्रभावित होगा ये सुनकर सत्ताधारी दल के नेताओं पर हंसी आती है। केंद्रीय मंत्रियों के दौरे को लेकर सत्ताधारी दलों ने राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद को ज्ञापन सौंपा है। जेएमएम, कांग्रेस और राजद के नेताओं को ये भरोसा है कि आयोग इस मामले को जरूर गंभीरता से लेगी। अगर ऐसा नहीं होता है तब सत्ताधरी दल का क्या रुख होगा इसके लिये थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने कहा है कि आयोग को गंभीरता से इसे लेने की जरूरत है। आखिर केंद्रीय मंत्रियों का दौरा इसी वक्त क्यों तय किया गया है।