टीम एबीएन, रांची। झारखंड की राजधानी रांची में जबरदस्त गर्मी पड़ रही है। लू के थपेड़ों की वजह से येलो अलर्ट भी जारी हो चुका है। ऐसे में राहगीरों की प्यास बुझाने के लिए प्याऊ की व्यवस्था की जाती है। इन प्याऊ को बनाने में करोड़ों रुपये खर्च हुए। लेकिन देखभाल के अभाव के कारण रांची में बने आधा दर्जन से अधिक प्याऊ जर्जर हो चुके हैं। रांची यूनिवर्सिटी के छात्रों का कहना है कि लाइब्रेरी में करीब एक हजार की संख्या में बच्चे पढ़ने आते हैं। लाइब्रेरी के अंदर में लगे वॉटर कूलर की बात तो छोड़िए बाहर लगे प्याऊ की स्थिति भी जर्जर है। वॉटर कूलर और सरकारी प्याऊ की असुविधा होने के कारण लाइब्रेरी में पढ़ने आए बच्चे टंकी का पानी पीने के लिए मजबूर हैं। रांची में प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे जोगेश बताते हैं कि 3 साल पहले टंकी का पानी से कुछ बच्चों की तबीयत खराब हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने कॉलेज प्रशासन को इसे लेकर चिट्ठी लिखी थी। लेकिन 3 साल बाद भी कॉलेज प्रशासन की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया गया है। सड़क किनारे बने प्याऊ और शीतल जल के फ्रीजर महज शो-पीस बनकर रह गए हैं। कुछ प्याऊ के नल्के टूटे हुए हैं, तो कुछ में पानी नहीं आ रहा है। ऐसे में राहगीरों को शुद्ध और शीतल जल उपलब्ध कराने के सरकारी दावे मानो बेइमानी प्रतीत होती है।दिन प्रतिदिन बढ़ती तपिश से गला सूखने लगा है, लोगों को प्यास सताने लगी है। ऐसे में प्रशासन की ओर से गर्मी को लेकर तैयारी ग्राउंड जीरो पर अधूरी नजर आ रही है। रांची में दिनभर अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री और जनप्रतिनिधियों की आवाजाही होती है। लेकिन इन माननीयों की नजर बदहाल हो रहे इन प्याऊ पर नहीं जाती है। ऐसे में जनता और राहगीरों के पास पानी के लिए भटकना या अपने जेब से पैसा खर्च प्यास बुझाने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं है।