CCL गांधीनगर हॉस्पिटल में मरीज की मौत के बाद डॉक्टर से मारपीट-बवाल, आंदोलन पर उतरे डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी
ABN Bureau• 27 Apr, 2021
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रांची। सीसीएल गांधीनगर हॉस्पिटल में एक मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों और साथ आये लोगों ने महिला डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों से मारपीट की। उन्होंने लगभग आधे घंटे तक जबर्दस्त बवाल किया। बाद में गोंदा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। इस घटना से गुस्साये डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी उद्वेलित हैं। वे हॉस्पिटल में सीआईएसएफ की तैनाती की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस पैनमडेमिक में भी तमाम डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मी जी-जान लगाकर सुबह से देर रात ओवरटाइम ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन इसके बदले अगर उनपर रोज हमले होंगे, तो काम करना संभव नहीं होगा। वे इस मामले में सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता से हस्तक्षेप की गुहार लगा रहे हैं।बताया गया है कि सीएमपीडीआई के एक कर्मी अरुण कुमार को सांस लेने की दिक्कत के चलते हॉस्पिटल लाया गया था। डॉक्टरों ने उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट दिया था। इस बीच उनकी स्थिति बिगड़ गयी और उन्होंने सुबह करीब साढ़े नौ बजे अंतिम सांस ली। मरीज की मौत के बाद उनके परिजन और साथ आये लोगों ने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। ड्यूटी पर तैनात महिला चिकित्सक डॉ संगीता मुंडले को हमले में चोटें आयी हैं।अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की और गाली-गलौज की गयी। गुस्साये लोगों ने हॉस्पिटल परिसर में तोड़-फोड़ भी की। हंगामे की वजह से पूरे हॉस्पिटल में अफरा-तफरी मच गयी। मॉर्निंग शिफ्ट में आये तमाम डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी काम छोड़कर बाहर आ गये। बाद में गोंदा थाने की पुलिस पहुंची। मारपीट के आरोप में दो लोगों को हिरासत में लिये जाने की सूचना है। बता दें कि लगभग 10 दिन पहले भी एक डॉक्टर के साथ मारपीट की घटना हुई थी। इस मामले में भी प्रबंधन की ओर से कोई कार्रवाई न होने से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि हॉस्पिटल में सीआईएसएफ की तैनाती नहीं होती है और उनकी सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिलती है, तो वो काम करने की स्थिति में नहीं होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से इस मामले में सीधे हस्तक्षेप की गुहार लगायी है। उनका कहना है कि वे हर रोज तय ड्यूटी से कई घंटे ज्यादा हॉस्पिटल में सेवा दे रहे हैं। हॉस्पिटल में क्षमता से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। कोशिश हो रही है कि उपलब्ध संसाधनों के बीच बेहतर से बेहतर सेवा दी जाये, लेकिन अगर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ रोज मारपीट और बदसलूकी होगी तो वे कैसे काम कर पायेंगे।