टीम एबीएन, रांची। रामकृष्ण मिशन आश्रम रांची में स्वामी भवेशानंद महाराज के सान्निध्य में आयोजित योगा फ़ॉर हॉलिस्टिक वेल-बिइंग कार्यक्रम में आश्रम के अंतेवासी, साधक और मुख्य रूप से रांची यूनिवर्सिटी तथा श्यामाप्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी के योग डिपार्टमेंट के छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए मुक्तरथ जी ने बताया कि योग को सरलता से आप न लें। यह न तो शारीरिक व्यायाम है और न ही ध्यान में चुपचाप बैठ जाने की क्रिया है। योग को अपने जीवन में बहुत अच्छे से उतारें और उसका अनुभव करें। एक-एक आसन और प्राणायाम को धैर्यपूर्वक, मन और भावनाओं से युक्त होकर लम्बे समय तक करें तब तभी योग के मर्म को आप समझ सकते हैं। स्वामी विवेकानंद के कर्मयोग, ज्ञानयोग, राजयोग और भक्तियोग के अभ्यासों द्वारा आप अपने चित्त को शांत कर जीवन के मर्म को समझना बहुत जरूरी है। हां, यह भी सत्य है कि योग आपके अनेकों व्याधियों को नष्ट कर सकता है पर यदि आपके जीवन पद्धति में योग नहीं उतर पाया तो तो आप बार-बार कभी शारीरिक रोग से, कभी मानसिक रोग से, कभी व्यावहारिक रोग से, तो कभी सामाजिक रोग से परेशान होते ही रहेंगे। रामकृष्ण मिशन आश्रम प्रदेश में योगयुक्त-रोगमुक्त झारखण्ड की परिकल्पना को लेकर आज से अपना अभियान शुरू कर दिया है, जिसमें पूरे प्रदेश में एक लाख योग वॉलेंटियर तैयार करने का लक्ष्य रखा है और इस कार्यक्रम के सहयोगी हैं। स्वामी मुक्तरथ तथा इनका सत्यानन्द योग मिशन। आरके मिशन के कर्मठ योग साधक प्रीतम बनिक कार्यक्रम को गांव-गांव तक फैलाने का कार्य कर रहे हैं। आज के कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता डॉ निशान्त वैभव योग और स्ट्रेस पर अपना व्यख्यान दिये तथा परिणीता सिंह अपने विचार रखे।