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वकीलों की भागीदारी से ही मामलों का निष्पादन संभव : न्यायायुक्त

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वकीलों की भागीदारी से ही मामलों का निष्पादन संभव : न्यायायुक्त
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टीम एबीएन, रांची। झालसा के दिशा निर्देश पर सिविल कोर्ट एवं समाहरणालय में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिसमें 41 हजार से अधिक मामलों का निष्पादन किया गया। साथ ही मौके पर 45 करोड़ रुपये से अधिक का सेटलमेंट हुआ। इससे पूर्व सिविल कोर्ट के 40 कोर्ट बिल्डिंग के सभागार में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन न्यायायुक्त एके राय, फैमिली कोर्ट जज रशिकेश कुमार, एजेसी वन एसके शशि, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एसपी अग्रवाल एवं महासचिव संजय कुमार विद्रोही ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में न्यायायुक्त ने कहा कि वकीलों के सहयोग से ही लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों का निष्पादन होता है। लोक अदालत एक ऐसा मंच है जहां एक न्यायिक पदाधिकारी वकील या स्टॉक होल्डर से अनौपचारिक बातचीत करते हैं। अदालत में तो जो भी बात होती है वह कानून के दायरे में ही होती है। हम वकीलों को समझें, वह हमें समझें। संजय कुमार विद्रोही ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत पूरे भारत वर्ष में मनाया जा रहा है। जब भी लोक अदालत का आगाज होता है, तो उसकी गड़गड़ाहट एक माह पूर्व से ही सुनने को मिलने लगती है। कहा कि लोक अदालत में निष्पादन के लिए जिन मामलों को सूचीबद्ध किया जाता है। उस केस के संबंधित वकीलों को इसकी जानकारी होनी चाहिए। ताकि उनकी जानकारी में मामलों का निष्पादन हो सके। कार्यक्रम को फैमिली कोर्ट जज, एजेसी वन एवं सदर एसडीओ दीपक दुबे ने भी संबोधित किया। मंच का संचालन डालसा सचिव कमला कुमारी ने की। जबकि धन्यवाद ज्ञापन एसीजेएम मनोरंजन कुमार ने किया। कार्यक्रम में सभी न्यायिक पदाधिकारियों, पीपी, एपीपी, पैनल अधिवक्ता, लॉ स्टूडेंट, पीएलवी समेत अन्य लोग मौजूद थे। बेटी की खुशी को देख पिता ने मुकदमा खत्म किया : डेढ़ साल की बेटी को देखकर पिता विशाल घई का दिल पसीजा और विवाद को समाप्त कर बच्ची के साथ रहने पर राजी हुए। पति-पत्नी के विवाद के कारण बच्ची को पिता का प्यार नहीं मिल पा रहा था। विशाल घई और पत्नी श्रृष्टि कुमारी के बीच वैवाहिक विच्छेद का मुकदमा चल रहा था। जो अब समाप्त हो गया। बता दें कि दोनों शादी 11 जून 2019 को शादी हुई थी। दोनों के मामले का निष्पादन राष्ट्रीय लोक अदालत में किया गया।
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