झारखंड
28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल सफल बनाने की अपील
ABN Bureau
•
13 Mar, 2022
•
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टीम एबीएन, कोडरमा। सीटू सहित 11 ट्रेड यूनियनों और कर्मचारियों एवं मजदूरों के फेडरेशनों ने केन्द्र सरकार की मजदूर कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ 28 - 29 मार्च को आयोजित दो दिवसीय हड़ताल की तैयारी को लेकर सीटू एवं केन्द्रीय व राज्य कर्मचारी संगठनों की संयुक्त बैठक प्रकाश होटल में संपन्न हुआ। बैठक में सीटू राज्य कमिटी सदस्य संजय पासवान ने कहा कि यह हड़ताल मोदी सरकार द्वारा देश की सम्पदा का मेगा सेल लगाए जाने के खिलाफ और मजदूर विरोधी चार लेबर कोड रद्द करने, न्यूनतम मजदूरी 26 हजार करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, निजीकरण पर रोक लगाने सहित मजदूरों की लंबित मांगों को लेकर की जा रही है। केन्द्र सरकार द्वारा मजदूर कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी कर उल्टे उन पर हमले कर रही है। रोजगार के अवसर बंद होते जा रहे हैं, नोटबंदी और कोरोना महामारी के बाद लगभग 25 लाख छोटे कारखाने बंद हो गए और 14 करोड़ लोग बेरोजगार हो गए। आज देश में बेरोजगारी की स्थिति भयावह हो गई है। दूसरी तरफ कमरतोड़ महंगाई के कारण आम लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। मोदी सरकार द्वारा श्रम कानूनों में संशोधन के साथ हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ जैसे स्टील, रेलवे, राजमार्ग, रक्षा, बीमा, बैंक, बीमा, पेट्रोलियम, फार्मास्यूटिकल्स, दूर संचार, हवाई अड्डे, बंदरगाह, डाक सेवा और खनन क्षेत्र में एफडीआई लाकर पूंजीपतियों के लिए कॉरपोरेटाईजेशन का रास्ता साफ कर किया जा रहा है। बैंक इम्पलाईज फेडरेशन के नेता शिवशंकर वर्णवाल ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों में जमा राशि का 86 प्रतिशत हिस्सा आम जनता का है। लेकिन केवल 10 कॉरपोरेट घरानों के पास ही इन बैंकों का 12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज के रूप में बकाया है और सरकार उन्हें बैड लोन के नाम पर छूट दे देती है। 29 सरकारी बैंकों में से कुछ प्रमुख बैंकों का एकीकरण कर दिया है। जिसके बाद अब केवल 12 सरकारी बैंक ही अस्तित्व में रह गया है, जिसका भी निजीकरण के लिए संसद में कानून लाया जा रहा है। बीमा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष महावीर यादव सचिव मनोरंजन कुमार ने कहा कि एलआईसी में आईपीओ लाकर देश के 40 करोड़ पॉलिसी धारकों के साथ धोखा किया जा रहा है। 35 लाख करोड़ की सम्पत्ति वाला एलआईसी पहले ही वित्तीय रूप से मजबूत है, उसको किसी और अधिक पूंजी की आवश्यकता नहीं है। यह स्वयं पूंजी निर्माता है एवं देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष शैलेन्द्र तिवारी और महामंत्री शशि पाण्डेय ने कहा कि आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा लाया जा रहा है, जिनका कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है और सरकारी कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है। उन्होंने राजस्थान और छतीसगढ़ की तर्ज पर झारखंड में भी पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने की मांग की। आंगनबाड़ी संघ की प्रदेश अध्यक्ष मीरा देवी ने आईसीडीएस कर्मियों को स्थाई करने व न्यूनतम 26 हजार वेतन देने की मांग की। बैठक में कर्मचारी महासंघ के संयुक्त सचिव दिनेश रविदास, बीएसएसआर यूनियन के सुनील कुमार गुप्ता, दिलीप कुमार सिन्हा, बेफी के विकास कुमार यादव, आंगनबाड़ी संघ की जिलाध्यक्ष शोभा प्रसाद, सचिव वर्षा रानी, चिन्तामणि देवी संतोषी देवी, गीता देवी, कर्मचारी महासंघ के संयुक्त सचिव अरविंद कुमार, रामकृष्ण गिरी आदि मौजूद थे।
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