रांची। इस बार के विश्व किडनी दिवस पर मेदांता अस्पताल, रांची ने किडनी रोगियों को और बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए एक तोहफा दिया है। यहां सीआरआरटी (कंटीन्यूअस रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी) मशीन लगाई गई है। यह विशेष प्रकार की डायलिसिस मशीन है। मेदांता अस्पताल, रांची में सीनियर नेफ्रोलॉजिस्ट एंड रेनल ट्रांसप्लांट फिजिशियन डॉ. अमित कुमार के मुताबिक अत्यधिक हेमो डायनामिक अस्थिर मरीज, हृदयाघात के साथ एक्यूट किडनी फेल, सिर में चोट के साथ एक्युट किडनी रोग, जहर का सेवन, एआरडीएस(एक्यूट रेस्पीरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम), लीवर फेल या कई अंगों के फेल होने की स्थिति में सीआरआरटी का इस्तेमाल किया जाता है। डॉ अमित कुमार के मुताबिक संक्रमण (सेप्सिस) की वजह से एक मरीज एक्युट किडनी फेल्योर से गुजर रहे थे। रेफरेक्ट्रोरी हाईपोटेंसिव की वजह से उनका रक्तचाप बेहद कम हो गया था। ऐसे में सामान्य डायलिसिस नहीं किया जा सकता था। परिस्थिति के अनुसार सीआरआरटी (कंटीन्यूअस रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी) की जरूरत थी। बिहार-झारखंड में सिर्फ मेदांता अस्पताल, रांची में ही सीआरआरटी मशीन है। हमलोग ने इसी मशीन से उक्त मरीज का डायलिसिस किए जिससे तत्काल रक्तचाप और पल्स रेट ठीक हुआ। पीएच भी सामान्य हुआ। इस संबंध में मेदांता अस्पताल के यूनिट हेड डॉ एमडी मुख्तार सईद का कहना था कि हमारा हरदम प्रयास लोगों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना है। कोशिश है कि झारखंडवासियों को इलाज के लिए किसी दूसरे राज्य में नहीं जाना पड़े।
इस बार का थीम हेल्थ फॉर आॅल : मेदांता अस्पताल, रांची के डॉ अमित कुमार के मुताबिक इस वर्ष 10 मार्च को मनाया जा रहे विश्व किडनी दिवस का थीम हेल्थ फॉर आॅल है। अर्थात सभी के बीच किडनी की बीमारी को लेकर जागरूकता हो।
डायबिटीज और रक्तचाप नियंत्रित रखें : मेदांता अस्पताल, रांची के नेफ्रालॉजिस्ट डॉ अमित कुमार के मुताबिक डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हाइपर टेंशन, मोटापा वालों की संख्या ज्यादा बढ़ रही है। यह डायबिटीज का एक बड़ा कारण है। कीटनाशक या गलत दवा और अनुवांशिक बीमारी भी किडनी फेल के मुख्य वजह हैं। अनुवांशिक किडनी रोग मरीज से उसके बच्चों में फैलता है। अगली पीढ़ी में ट्रांसफर से बचाने के लिए उसका समय रहते डायग्नोस जरूरी है। वैसे सामान्य व्यक्ति भी अपनी किडनी का समय-समय पर जांच कराते रहें। उच्च रक्तचाप और शुगर मरीज को खास ख्याल रखना चाहिए।