टीम एबीएन, बरही (हजारीबाग)।
एनएचएआई के द्वारा सड़क चौड़ीकरण के दौरान बरही क्षेत्र में नियमित तरीके से कम नही होने के कारण प्रतिदिन सड़क दुर्घटना में कई होनहार नौजवानों की मौत हो रही है। पिछले एक दशक में यहां सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या काफी बढ़ गई है। क्षेत्र में हर साल हो रहे हादसों में सौ से अधिक लोगों की जान सड़क हादसों में जा रही है। सड़क हादसों में मरने वालों की लंबी हो रही फेहरिस्त से बरही की काली सड़कें लाल हो रही हैं। ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता कि सड़क हादसे में किसी की मौत न हो।सड़क दुर्घटनाओं में प्रति वर्ष सैकड़ों लोगों की जान जाने के बावजूद पुलिस, प्रशासन व संबंधित विभागों द्वारा इस पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। कुछ कदम उठाए जाते हैं, लेकिन वह कारगर साबित नहीं होते, जिसका खामियाजा वाहन चालकों को भुगतना पड़ता है। चालकों की जरा सी लापरवाही ने कइयों की जिंदगी लील ली और परिजनों को जीवनभर का दर्द दे दिया। तेज गति, लापरवाही और शराब के नशे में वाहन चलाने के कारण तीन साल के दौरान सैकड़ों लोग मौत की आगोश में आ चुके हैं। चालकों की जरा सी लापरवाही से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिछले साल चार दर्जन के करीब मौतें हो चूंकि है। वहीं, सैकड़ों लोगों से अधिक लोग घायल हो चुके है। सड़क दुर्घटना में लगातार हो रही मौतों के लिए सरकारी व्यवस्था तो जिम्मेदार है ही, साथ ही वाहन चालक भी कम दोषी नहीं हैं। लोग यातायात नियमों का उल्लंघन करना शान समझते हैं। यही कारण है कि वह दुर्घटना का शिकार होते हैं और जान से हाथ धो देते हैं। इसके चलते ही बरही में दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है। बरही में ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता, जिस दिन किसी मां की गोद सूनी न होती हो या किसी बच्चे के सिर से पिता का साया न छिनता हो, किसी पत्नी की मांग का सिंदूर न उजड़ता हो। विडंबना है कि इसके बाद भी लोग सबक लेने के लिए तैयार नहीं हैं। थाना क्षेत्र के धमना मोड़ के पास टैंकर की चपेट में आकर एक व्यक्ति की मौत हो गई। पहले भी बरही में इस तरह के हादसे हो चुके हैं, लेकिन कोई भी सबक लेने को तैयार नहीं है। तत्काल बरही पुलिस घटना स्थल पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लेते हुए अंत्यपरीक्षण के लिए हजारीबाग अस्पताल भेज दिया। खबर लिखे जाने तक शव की पहचान नहीं हो पायी है।
नियमों के पालन से हो सकता है बचाव : सड़क हादसों का एक बड़ा कारण चालकों द्वारा यातायात नियमों का उल्लंघन करना भी है। इससे अधिक सड़क हादसे होते हैं। इसके चलते चालक स्वयं की जान तो खतरे में डालता ही है, दूसरे व्यक्ति के लिए भी खतरा बनता है। यदि सभी के द्वारा नियमों का पालन किया जाए तो सड़क हादसों में कमी आने के साथ मरने वालों की संख्या भी कम हो सकती है।
बार-बार दुर्घटनाओं के ये भी कारण : बार-बार दुर्घटनाएं घटित होने के पीछे सड़क पर धीमी गति के ब्रेकर नहीं होने, मोड़ पर ब्रेकर नहीं होने, सड़क के दोनों तरफ आबादी होने, अचानक पशुओं का आगे आ जाना, सड़कों का खराब होना, चेतावनी बोर्ड नहीं लगाना घटना घटित होने का कारण माना गया है।
युवा ज्यादा हादसे का शिकार :
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार हादसों का शिकार होने वालों में ज्यादातर युवा हैं। मृतक व घायल 18 से 40 वर्ष के बीच के हैं। ऐसे में युवाओं को विशेष तौर पर यातायात के बारे में समझाया जाएगा। ताकि हादसों पर अंकुश लगे।