हजारीबाग (अभय कुमार सिंह)। शहर में लॉटरी का कारोबार इन दिनों जोर-शोर से चल रहा है। इसे रोकने में पुलिस महकमा पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। प्रतिदिन 1 से 2 करोड़ की लॉटरी हजारीबाग में खपाई जा रही है। जिले में शहर के अलावा प्रखंड के ग्रामीण इलाकों की चाय, पान दुकानों में लॉटरी की बिक्री हो रही है। आम से लेकर खास लोग तक लॉटरी की खरीदारी कर रहे हैं। लॉटरी के इस खेल में दिहाड़ी मजदूर सहित छोटे-छोटे दुकानदार भी अपनी कमाई लुटा रहे हैं।
फलों के नाम पर होता है खेल : रातों-रात अमीर बनने के चक्कर में युवा वर्ग और गरीब मजदूर आसानी से धंधेबाजों के झांसे में आ जाते हैं। लॉटरी की लत ऐसी होती है कि इसे खरीदने के लिए कर्ज और कभी चोरी का भी सहारा लेते हैं। लॉटरी बेचने वाले कोडवर्ड में लॉटरी की टिकटों को बेचते हैं। 50 रूपये वाले टिकट को सेव, 100 वाले टिकट को पपिता और 200 वाले टिकट को अनार बोला जाता है।
धंधेबाज हैं बेखौफ : लॉटरी का धंधा प्रतिबंधित होने के बावजूद कारोबारी बेखौफ हैं। पुलिस ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। शहर के टोल टैक्स चौक, मोहन टॉकिज के आसपास, सरदार चौक, झंडा चौक, बुचड़ टोली चौक, इंद्रपुरी सिनेमा के आसपास, झील परिसर के आसपास, डेली मार्केट में आसानी से लोट टिकट खरीदते-बेचते देखे जा सकते हैं। हैरानी है कि पुलिस की नजर से ये बचे हुए हैं।
हर घंटे निकलती लॉटरी : अवैध लॉटरी का कारोबार में फंसकर भोले लोग अपने पैसे गंवा रहे हैं। बावजूद इसके लालच में दोबारा लॉटरी की टिकट खरीदने पहुंच जा रहे हैं। जानकर बताते है कि हर घंटे लॉटरी खोली जाती है। सुबह छह बजे से शाम के सात बजे तक अवैध लॉटरी का खेल चलाया जाता है। जहां किस्मत खुलने की उम्मीद में आए लोग के पैसे लुट जाते हैं।