गुमला। बांग्लादेश मुक्ति के लिए वर्ष 1971 में हुए भारत पाक युद्ध के दौरान दुश्मनों को मार गिराकर अपने अदम्य साहस, वीरता, शौर्य और पराक्रम के बल पर परमवीर चक्र से सम्मानित जारी गांव के वीर सपूत परमवीर अल्बर्ट एक्का की पत्नी बलमदीना एक्का का निधन गुरुवार की देर रात हो गया। बलमदीना लंबे समय से बीमार चल रही थी। उन्होंने अपने चैनपुर आवास पर अंतिम सांसें ली। वे पुत्र भिसेंट एक्का, पुत्रवधु रागिनी एक्का और भरा-पूरा परिवार छोड़ गयी हैं। वीरांगना बलमदीना के निधन से पूरे गुमला जिला में शोक की लहर छा गयी है। उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का तांता रहा। उनका अंतिम संस्कार यानी दफन क्रिया जारी गांव के आवासीय परिसर में परमवीर के बने कब्र के पास किया गया। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया। दफन क्रिया से पहले उनके पार्थिव शरीर को चैनपुर से फूलों से सुसज्जित वाहन से जारी ले जाया गया। जहां मिस्सा बलिदान फादर पात्रिक मिंज, फादर रेमिश मिंज और फादर अमृत टोप्पो ने चढ़ाया। धर्म पुरोहितों ने कहा कि परमपिता ने बलमदीना को अपने पास बुलाया है। मृत्यु जीवन का अंत नहीं बल्कि जीवन की शुरूआत है। परमपिता से प्रार्थना है कि परमपिता इन्हें परमशांति प्रदान करें और स्वर्ग में स्थान प्रदान करें। इस मौके पर उनके पुत्र भिसेंट एक्का, पुत्रवधु रागिनी एक्का, उनके परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे। शुक्रवार की सुबह उनके निधन की खबर जंगल में आग की तरह फैल गयी। उनके अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगाा रहा।