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संत गड़के के विचार आज भी प्रासंगिक : शालिनी गुप्ता

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संत गड़के के विचार आज भी प्रासंगिक : शालिनी गुप्ता
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टीम एबीएन, कोडरमा। संत श्री गड़के महाराज द्वारा समाज सुधार के क्षेत्र में किये वह अनुकरणीय है। उनके द्वारा किए गए प्रयास को सदियों तक भुलाया नहीं जा सकता। उनसे प्रेरित होकर सूद समेत लौटाने की जरूरत है। इसके लिए आज के युवाओ को सामाजिक कुरीतियों को बदलने के लिए बढ़ चढ़कर आगे आना चाहिए। उक्त बातें बुधवार को झुमरी तिलैया के श्री माहुरी भवन में अखिल भारतीय धोबी संघ के तत्वावधान में आयोजित संत श्री गढ़ के महाराज की 146 मी जयंती के मौके पर जीप प्रधान शालिनी गुप्ता ने कही। उन्होंने आगे कहा कि 23 मई 1876 में संत श्री गाडगे महाराज का जन्म हुआ और उन्होंने 50 वर्षों तक मानवता के लिए भिक्षा कर उस समय धर्मशाला, पाठशाला और पंच साला का निर्माण किया और ऊंच-नीच, अमीरी गरीबी जैसे सामाजिक कुरीतियों को मिटाने के लिए कार्य करते रहे। आज उनके किए गए कार्यों को ब्याज सहित लौटाने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा में बेटा बेटी को बराबरी के रूप में पढ़ाने की जरूरत है और समाज को उनके सिद्धांतों से सीखने की आवश्यकता है। वही संत गाडगे संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल दास ने कहा कि आज हमें संत गाडगे के बताए मार्ग पर चलने की जरूरत है और किसी महान पुरुष को उसे जाती बंधन में बांधने की जरूरत नहीं है। संत गाडगे के जीवन दीन दुखियों और जरूरतमंदों की सेवा का एक उद्देश्य था। उन्होंने अपने मिशन में 31 कॉलेज स्कूल और छात्रावास बनाएं वही राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वासुदेव अवध्या ने कहा कि मानवता के महान उपासक संत गाडगे की जयंती कोडरमा में पहली बार मनाई जा रही है और उनके सिद्धांतों को जन जन तक पहुंचाने का प्रयास शुरू किया गया है। जिला आपूर्ति पदाधिकारी प्रमोद राम ने कहा कि संत श्री गाडगे एक क्रम प्रधान संत थे। समाज की बुराइयों को समाप्त करने की बीड़ा उन्होंने उठाई थी वह ऐसा राज चाहते थे जहां सभी को अन्न मिले और उनके सपने जो अधूरे हैं उन्हें पूरा किया जा सके। समारोह को झारखंड दलित मंच के जिला अध्यक्ष दिनेश रविदास, जिप सदस्य महादेव राम, अखिल भारतीय धोबी महासंघ के कोडरमा जिला अध्यक्ष खगेंद्र राम संरक्षक दुर्गा प्रसाद राम रतन अयोध्या एलआईसी के अधिकारी सुशील कुमार नगर कमेटी के विजय रजक आदि वक्ताओं ने कहा कि अंधविश्वास समाज के लिए अभिशाप है उन्होंने कहा कि भूखे को अन्न प्यासे को पानी पिलाओ गरीब बच्चों को शिक्षा बेघरों को आश्रम अंधी और निशक्त जनों और रोगियों का उपचार कराना है। संत श्री गाडगे का मुख्य उद्देश्य था उनका जीवन एक ध्येय दरिद्र नारायण की सेवा दीन दुखियों और जरूरतमंदों की मदद करना उद्देश्य था। उनके सिद्धांतों को समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचाया जाएगा आधी रोटी खाएंगे और बच्चों को शिक्षा दिलाएंगे जैसे उन्होंने समाजवाद का नारा दिया था। कार्यक्रम की शुरूआत में बाबा साहब अंबेडकर एवं संत गाडगे की तस्वीर पर अतिथियों ने पुष्पांजलि किया। इसके बाद कोसिक और कंचन कुमारी ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। मंच का संचालन दशरथ रजक ने किया और धन्यवाद ज्ञापन रविंद्र रजक ने किया। इस अवसर पर देवेंद्र प्रसाद रविंद्र रजक मनोज कुमार उमेश कुमार विनय कुमार गंदौरी रजक, विनोद राम,हिरामन राम, मुन्नी लाल रजक, संघ के सचिव मनोज दिवाकर, सरस्वती देवी, राधा देवी, अनिता कुमारी, रीना कुमारी आदि उपस्थित थे।
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