टीम एबीएन, रांची। गोस्सनर कॉलेज में नागपुरी, कुंड़ुख, मुंडारी और संथाली विभाग के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर संगोष्ठी की गयी। मौके पर मातृभाषा के महत्व पर प्रकाश डाला गया। मातृभाषा न सिर्फ संवाद स्थापित करने का सशक्त माध्यम है अपितु इसमें समुदाय का इतिहास, परंपरा और संस्कृति भी निहित रहती हैं। मातृभाषा के समाप्त होते ही सारी ज्ञान समाप्त हो जाती हैं। गोस्सनर कॉलेज के डॉ. योताम कुल्लू ने कहा कि मातृभाषा का पूर्णत: सरकारीकरण जरूरी है। इस दिशा में सरकार को प्राथमिकता के आधार पर काम करने की जरूरत है। रोजगार की भाषा बनाने के साथ पठन-पाठन में अनिवार्य रूप से इन भाषाओं का समावेश जरूरी है। कुंड़ुख विभाग के प्रोफेसर हेमंत कुमार टोप्पो ने कहा कि हमें घरों में अपनी भाषाओं को प्रयोग में लाने की जरूरत है। नागपुरी विभाग के डॉक्टर कोरनेलियुस मिंज ने कहा कि भाषा को प्रयोग में लाकर ही बच सकते हैं । अब तो पठन-पाठन में भी मातृभाषाओं को शामिल किया गया है। जरूरत है अभिभावकों और बच्चों को अपनी भाषा के प्रति जुड़ाव दिखाने और अध्ययन करने की। मुंडारी की प्रोफेसर मीना सुरीन ने भी बच्चों को अपनी मातृभाषा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। संथाली विभाग के फ्रांसिस मुर्मू ने कहा कि जो समुदाय अपनी भाषा को छोड़ देता है वह दिशा विहीन हो जाता है। इस अवसर पर संथाली विभाग के छात्र डेविड मुर्मू, माइकल मुर्मू और सुभाष बास्के ने भी मातृभाषा पर अपना विचार रखा। कार्यक्रम में कई विद्यार्थी उपस्थित थे।