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बजट सत्र के प्रश्नकाल में रांची के सांसद ने रखी राज्य की समस्याएं

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बजट सत्र के प्रश्नकाल में रांची के सांसद ने रखी राज्य की समस्याएं
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एबीएन सेंट्रल डेस्क। लोकसभा के बजट सत्र में आयोजित प्रश्नकाल में रांची के भाजपा सांसद संजय सेठ ने राज्य की समस्याओं को पटल पर रखा। इस दौरान उन्होंने राज्य में लगातार हो रही मॉब लिंचिंग पर रोक लगाने के लिए कड़े नियम बनाने और उन्हें सख्ती से लागू करवाने की मांग भी की। इस दौरान नियम 377 के तहत लोकसभा में रांची में रेलवे का क्षेत्रीय कार्यालय खोलने का आग्रह किया। 255 छोटे-बड़े रेलवे स्टेशन के माध्यम से सालाना 25,000 करोड रुपये का राजस्व झारखंड रेल मंत्रालय को देता है। ऐसी स्थिति में झारखंड में रेलवे के विकास को और गति मिले, इसलिए यह आवश्यक है कि यहां रेलवे का क्षेत्रीय कार्यालय खोला जाए। नियम 377 के तहत लोकसभा में झारखंड और देश के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन को लिपिबद्ध करने का आग्रह सरकार के समक्ष रखा। आजादी के अमृत काल में जब हम देश की आजादी का 75वां वर्षगांठ मना रहे हैं तो ऐसे में यह आवश्यक है कि गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन को जनता के सामने लाया जाए। उसे स्कूली पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाए। स्वतंत्रता सेनानियों को अमृत काल में हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। शून्यकाल में हजारीबाग के बरही में मॉब लिंचिंग का शिकार हुए रूपेश पांडेय के परिवार को न्याय दिलाने और इसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग सरकार के समक्ष रखा। मॉब लिंचिंग के मामले में झारखंड की स्थिति दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है, इसलिए केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया। झारखंड के स्वतंत्रता सेनानी जीतराम बेदिया को मान्यता देने से संबंधित आग्रह सदन में किया ताकि जीतराम बेदिया जी के द्वारा स्वतंत्रता संग्राम में जो योगदान दिया गया, हम सब उनके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट कर सकें। ऐसे सभी स्वतंत्रता सेनानियों के लिए आजादी के इस अमृत काल में मेमोरियल बनाने का आग्रह किया। रासायनिक उर्वरकों का कृषि कार्यों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर लोकसभा में सरकार के समक्ष सवाल रखा। जिसमें यह जवाब आया कि 5 दशक में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य खराब हुआ है। इसका असर आम जीवन पर भी पड़ा है। इसको देखते हुए 2015 से राष्ट्रीय स्तर पर मिट्टी के स्वास्थ्य परीक्षण पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने काम करना शुरू किया है। वहीं झारखंड को बीते 3 वर्ष में जितनी आवश्यकता है, उससे अधिक खाद की आपूर्ति किसानों के लिए की गई है। कोरोना संक्रमण काल में विद्यालय और अभिभावकों की स्थिति को देखते हुए शिक्षण शुल्क माफ करने या इसमें छूट देने से संबंधित जानकारी सरकार से मांगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने जवाब में यह बताया कि स्कूलों के शिक्षण शुल्क पर पूर्णत: राज्य सरकार का नियंत्रण होता है, इसलिए इस मामले में राज्य सरकार ही उचित फैसला ले सकती है। कौशल विकास से संबंधित सवाल सदन के माध्यम से सरकार के समक्ष रखा, जिसमें यह बताया गया कि कौशल विकास से प्रशिक्षण प्राप्त कर देश भर में 23 लाख 70 हजार 255 लोगों को नौकरियां मिली है, जिनमें झारखंड में 26671 लोग शामिल हैं। कौशल विकास मंत्रालय महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी बेहतर कार्य कर रहा है ताकि महिलाओं के कौशल का विकास हो। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय से मेरा सवाल स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने से संबंधित था, जिसके जवाब में मंत्रालय ने बताया कि झारखंड में 410 करोड़ की लागत से 21 हजार से अधिक पर योजनाओं का संचालन हुआ। इन परियोजनाओं के माध्यम से खादी सिल्क, मोची मिशन, इमली प्रसंस्करण, मधु मिशन, कुंभकार सशक्तिकरण, अगरबत्ती निर्माण से संबंधित कई प्रकार के प्रशिक्षण का आयोजन हुआ और वर्तमान में 4000 से अधिक लोग स्वरोजगार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना से संबंधित सवाल पर केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय ने जवाब दिया कि झारखंड के 264 लाख लाभुकों को इस योजना का लाभ मिल रहा है और अब तक झारखंड को 19 लाख मिट्रिक टन अनाज उपलब्ध कराया जा चुका है। मार्च 2022 तक यह योजना चलेगी, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा खाद्य कानून के तहत प्रति व्यक्ति 5 किलो मुफ्त अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है। पोषक तत्वों से भरपूर मोटे व खुरदरे अनाजों की खेती से संबंधित सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने बताया कि मोटे व खुरदरे अनाजों की खेती को केंद्र सरकार प्रोत्साहित कर रही है। बीते 3 वर्षों में मकई की खेती में देश भर में जबरदस्त इजाफा हुआ है और इसकी पैदावार के साथ इसकी खपत में भी बढ़ोतरी हुई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़े सवाल पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में राज्य के 17 लाख 53 हजार किसानों को किसान सम्मान निधि की राशि प्रदान की गई है। किसान खेती के तरफ अधिक से अधिक ध्यान दें, इसके लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है और इस दिशा में प्राकृतिक खेती को बढ़ाने से संबंधित योजनाओं पर भी काम चल रहा है।
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