टीम एबीएन, रांची। मोरहाबादी के फुटपाथ दुकानदार लगातार 10 दिनों से धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि न सरकार को उनकी फिक्र है और न निगम पदाधिकारियों को। इसलिए अब उन्हें अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि सोमवार को अगर इस पर फैसला नहीं होता है, तो मंगलवार से वे अपनी दुकानें फिर से खोलेंगे। एक दुकानदार ने बताया कि यदि वे अपनी दुकानें नहीं खोलते हैं, तो उनके बीवी-बच्चों के भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। इसलिए सोमवार तक कोई फैसला नहीं आने पर वे मंगलवार से अपनी दुकानें खोलेंगे। रांची की मेयर डॉ आशा लकड़ा ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि मोरहाबादी मैदान के इर्द-गिर्द ठेला-खोमचा व अस्थाई दुकान लगाकर अपना जीवनयापन कर रहे लोगों की रोजी-रोटी हेमंत सोरेन की सरकार ने छीनी है। उन्हें उपयुक्त जगह देने की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार की ही है। रांची नगर निगम संबंधित दुकानदारों को जगह उपलब्ध कराने की दिशा में सिर्फ एक माध्यम है। इसलिए इन दुकानदारों की रोजी-रोटी छीने जाने को लेकर कुछ लोग रांची नगर निगम को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, जो गलत है। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों पूर्व मोरहाबादी में जिस जगह पर अपराधियों ने गोलीबारी की घटना को अंजाम दिया, वहां मुख्यमंत्री के पिता शिबू सोरेन का आवास है। इसलिए राज्य सरकार ने अपनी गलती को छिपाने के लिए वहां से ठेला-खोमचा व अस्थाई दुकानों को हटाने का फरमान जारी कर दिया। यदि राज्य सरकार चाहती तो संबंधित स्थल पर CCTV कैमरा लगाकर व पुलिस पेट्रोलिंग की नियमित व्यवस्था कर हाई सिक्योरिटी जोन को सुरक्षित कर सकती थी। संबंधित स्थल से निरीह दुकानदारों को हटाकर राज्य सरकार ने उनकी रोजी-रोटी छीनने का काम किया है। मेयर ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को जीने का अधिकार है। इसलिए संबंधित दुकानदारों से बातचीत कर उन्हें उपयुक्त स्थल पर बसाने की जरूरत है। जिस स्थल पर दुकानदारों के सामान की बिक्री ही नहीं होगी, वहां उन्हें शिफ्ट करने से इस समस्या का निदान संभव नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह कर कहा कि जब तक इन दुकानदारों के लिए उपयुक्त जगह की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उन्हें पूर्व की तरह ठेला, खोमचा व अस्थाई दुकान लगाने की इजाजत दी जाए। पुलिस-प्रशासन की ओर से हाई सिक्योरिटी जोन को सुरक्षित करने की व्यवस्था की जाए।