टीम एबीएन, रांची। सिरासिता नाला आदिवासियों का सृष्टि स्थल है। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष माघ महीना के बढ़ती चांद के पांचवें दिन 9 बजे सुबह ककड़ो लाता के पास सरना धर्म प्रार्थना और पूजा की गई। पूजा की अगुवाई राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा भारत ने की। सरना धर्मगुरु जयपाल उरांव, राज्य धर्मगुरु राजेश लिंडा और आकासो गांव के पाहन ने पूजा और प्रार्थना करायी। पूरे कार्यक्रम की अगुवाई राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज मुंडा, राष्ट्रीय महासचिव डॉ प्रवीण उरांव, राष्ट्रीय सचिव सोमे, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बिरसा, महिला प्रकोष्ठ के अध्यक्ष ने किया। साथ ही पूजा के बाद सभी ने 2 किलोमीटर पैदल चलकर धर्मकांडों में सामूहिक प्रार्थना-पूजा की। इसके बाद पहली बार "गंगला खईड" में पूजा-प्रार्थना की गयी। यहां के बाद सभी पहाड़ के बीचोंबीच सरना-धर्मेश एड़पा और पहाड़ के चोटी में ढबनी चुंआ पहुंचे और पूजा-प्रार्थना की। इस बार कोविड के कारण प्रचार-प्रसार नहीं होने के बावजूद लगभग 5 से 6 हजार सरना विश्वासीगण पहुंचे। इसमें अधिक संख्या में परिवार के लोग और पढ़ने वाले लड़का-लड़की पहुंचे थे।