टीम एबीएन, रांची। वित्तीय वर्ष 2021-22 के समाप्त होने में दो महीने से भी कम समय बचे हैं। ऐसे में राज्य सरकार का हर विभाग विकास योजना मद की अधिक से अधिक राशि खर्च करने में जुटी है। लेकिन जटिल प्रक्रिया के आगे विभाग बेबस है। ऐसे में इस वित्तीय वर्ष में हरेक विभाग 50 फीसदी भी राशि खर्च कर ले तो बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। झारखंड में विकास योजना का पैसा कोई भी विभाग खर्च नहीं कर पाया है। हालत ऐसा है कि कई ऐसे विभाग हैं जहां विकास योजना मद की राशि की आधी फीसदी रकम भी खर्च नहीं की गयी है। झारखंड सरकार विकास योजना मद की राशि खर्च ना कर पाने पर विपक्ष के निशाने पर है। विकास योजनाओं की राशि खर्च करने में झारखंड सरकार के कई विभाग सुस्त हैं। आलम यह है कि इस वित्तीय वर्ष 2021-22 के समापन में अब दो महीने भी नहीं बचे हैं। इसके बावजूद बजटीय प्रावधान के अनुरूप आवंटित राशि को खर्च विभाग द्वारा नहीं की जा रही है। जानकारी के मुताबिक सरकार के कई विभाग 50 फीसदी का भी आंकड़ा पार नहीं कर सका है। आंकड़ों के मुताबिक विकास योजनाओं पर 31 दिसंबर 21 तक सिर्फ 20,396.70 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके हैं। यह विकास योजनाओं पर खर्च के लिए निर्धारित लक्ष्य का करीब 37 फीसदी है। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में विकास योजनाओं पर 56,433.86 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है। विभागीय आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो सरकार के अधिकांश विभाग योजना मद की राशि के मुकाबले खर्च करने में काफी पीछे है। कृषि विभाग की योजना मद राशि 3248.45 करोड़ में से 21218.79 करोड़ खर्च कर पाई है। इसी तरह ग्रामीण विकास विभाग के 7672.77 करोड़ योजना मद की राशि में से 2601.42 करोड़ खर्च हुए हैं। योजना मद राशि की तूलना में खर्च करने में सर्वाधिक परिवहन विभाग 64.64%, उच्च शिक्षा 60.80%, ऊर्जा विभाग 43.82%, स्वास्थ्य विभाग 36.25%, जल संसाधन विभाग 47.19% रहा है। श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने अपने विभाग द्वारा किए जा रहे खर्च पर संतोष जताते हुए कहा है कि अन्य विभाग में भले ही राशि सरेंडर करें। लेकिन श्रम विभाग में 31 मार्च तक विभाग द्वारा आवंटित राशि पूरी तरह खर्च हो जाएगी। उन्होंने कहा कि 31 जनवरी तक करीब 65 फीसदी राशि श्रमिकों के कल्याण पर खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग में सीमित संसाधन के बावजूद श्रमिकों के कल्याण के लिए बेहतर काम हुआ है।