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आत्महत्या नहीं, हत्या है निशा भगत की मौत : समीर उरांव

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आत्महत्या नहीं, हत्या है निशा भगत की मौत : समीर उरांव
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टीम एबीएन, रांची। भाजपा एसटी मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद समीर उरांव ने आदिवासी नेत्री निशा भगत की असामयिक मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए झारखंड सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किये हैं। उन्होंने कहा कि निशा भगत एक निडर और संघर्षशील आदिवासी बेटी थीं, जो आदिवासी समाज की धर्म, संस्कृति, परंपरा, आस्था और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए लगातार आवाज उठा रही थीं। 

उन्होंने अपनी मौत से पहले सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो जारी कर कुछ लोगों द्वारा मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना तथा चरित्र हनन के गंभीर आरोप लगाये थे। उन्होंने पुलिस से सुरक्षा की मांग भी की थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। श्री उरांव ने कहा कि निशा भगत के वीडियो में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार, अजय तिर्की और झारखंड पुलिस सहित कुछ लोगों का नाम सामने आया है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। 

उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक आदिवासी बेटी पुलिस से सुरक्षा मांग रही थी, तब प्रशासन ने उसकी शिकायतों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया? उन्होंने कहा कि झारखंड में पहले भी सुभाष मुंडा, सोमा मुंडा, लक्ष्मीकांत मुंडा, रूपा तिर्की, संध्या टोपनो और प्रेम सागर मुंडा जैसे लोगों की मौत के मामले सामने आये हैं। इससे राज्य में आदिवासी समाज के अगुआ और सामाजिक कार्यकतार्ओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। 

समीर उरांव ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार खुद को अबुआ सरकार कहती है, लेकिन आज आदिवासी समाज के लोग ही अपने अधिकार, सम्मान और सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए आवाज उठाने वालों को सुरक्षा मिलनी चाहिए, न कि उन्हें प्रताड़ना और मौत का सामना करना पड़े।

भाजपा मांग करती है निशा भगत की मौत की सीबीआई जांच करायी जाये, अजय तिर्की सहित आरोपों में नामित लोगों की भूमिका की जांच कर दोषी पाये जाने पर तत्काल गिरफ्तारी हो, निशा भगत की पुलिस से हुई बातचीत और सुरक्षा संबंधी शिकायतों की जांच हो, लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हो, आदिवासी समाज के अगुआ और पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाये, आदिवासी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले दलालों और माफियाओं पर सख्त कार्रवाई हो। 

समीर उरांव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कहा कि सरकार निशा भगत को न्याय दिलाने और आदिवासी समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाये। यदि सरकार राज्य की जनता को सुरक्षा देने में असमर्थ है तो मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक शिवशंकर उरांव, प्रदेश प्रवक्ता अशोक बड़ाईक, एसटी मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष सन्नी टोप्पो, पूर्व विधायक रामकुमार पाहन, ओबीसी मोर्चा प्रदेश मंत्री प्रकाश साहू भी उपस्थित हुए।

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