एबीएन सोशल डेस्क। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनेक महापुरुषों ने अपने त्याग और समर्पण से इतिहास रचा है सेठ जमनालाल बजाज ऐसे ही राष्ट्रसेवक थे, जिन्होंने उद्योग, समाजसेवा और स्वतंत्रता आंदोलन को एक सूत्र में पिरोया। उनका जन्म 4 नवंबर 1889 को राजस्थान के काशी का बास गांव में हुआ था। इसलिए प्रत्येक वर्ष 4 नवंबर को उनकी जयंती मनायी जाती है।
उनका निधन 11 फरवरी 1942 को हुआ। जमनालाल बजाज का जीवन सादगी, सत्यनिष्ठा और लोककल्याण का अनुपम उदाहरण है। बाल्यावस्था में सेठ बच्छराज बजाज ने उन्हें गोद लिया और वे वर्धा के प्रतिष्ठित व्यवसायिक परिवार में पले-बढ़े। महात्मा गांधी के विचारों से गहरे प्रभावित होकर उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रसेवा को समर्पित कर दिया।
गांधीजी उन्हें स्नेहपूर्वक अपना पांचवां पुत्र कहते थे। जमनालाल बजाज ने गांधीजी के रचनात्मक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वाधीनता आंदोलन में उन्होंने असहयोग आंदोलन और नमक सत्याग्रह सहित कई आंदोलनों में भाग लिया। ब्रिटिश सरकार की राय बहादुर उपाधि का त्याग कर उन्होंने देश के प्रति अपनी निष्ठा प्रकट की।
वर्ष 1923 में नागपुर झंडा सत्याग्रह में उनकी सक्रिय भूमिका राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के लिए उनके दृढ़ संकल्प का प्रमाण बनी। जेल यात्राओं और संघर्षों के बावजूद उनका उत्साह कभी कम नहीं हुआ।वे सामाजिक कुरीतियों के विरोधी और समानता के समर्थक थे। अस्पृश्यता उन्मूलन, महिला सशक्तीकरण, खादी, ग्रामोद्योग, हिंदी प्रचार तथा ग्रामीण विकास के लिए उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किये।
वर्धा के लक्ष्मीनारायण मंदिर को दलितों के लिए खोलने की पहल सामाजिक समरसता की दिशा में ऐतिहासिक कदम थी। उनका विश्वास था कि समाज की प्रगति तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और समान अवसर मिले।जयंती मनाने का उद्देश्य उनके आदर्शों ईमानदारी, त्याग, स्वदेशी, सामाजिक न्याय और राष्ट्रभक्ति-को नयी पीढ़ी तक पहुंचाना है।
आज आर्थिक विकास के साथ नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की आवश्यकता पहले से अधिक है। जमनालाल बजाज का जीवन सिखाता है कि संपत्ति का सर्वोच्च उपयोग जनकल्याण में है और सच्ची सफलता वही है, जो राष्ट्र तथा समाज को मजबूत बनाए। उनकी स्मृति सेवा, उत्तरदायित्व और नागरिक कर्तव्य का संकल्प जगाकर सदैव राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा देती है।