झारखंडी भाषा बचाओ यात्रा ऐतिहासिक रूप से सफल, मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
टीम एबीएन, रांची। जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा के तत्वावधान में आज राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक होते हुए भगवान बिरसा मुंडा समाधि स्थल तक ऐतिहासिक झारखंडी भाषा बचाओ यात्रा निकाली गयी।
इसमें पूरे झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों से नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विद्यार्थी, शोधार्थी, प्रोफेसर, साहित्यकार एवं भाषा प्रेमी बड़ी संख्या में शामिल हुए। मुंडारी, कुड़ुख, हो, खड़िया, संताली, नागपुरी, कुरमाली, खोरठा एवं पंचपरगनिया भाषा के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा एवं अपने-अपने समुदाय के प्रतीक चिह्नों के साथ अपनी भाषाई पहचान और सांस्कृतिक एकजुटता का शानदार प्रदर्शन किया।
यात्रा में पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की, जेएलकेएम के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष दिशुम वीर बाबू देवेन्द्र नाथ महतो, संरक्षक डॉ. हरि उरांव, डॉ. खलील अहमद, डॉ. शकुंतला मिश्रा, डॉ. वृंदावन महतो, संयोजक पप्पु कुमार महतो, डॉ. सरस्वती गगराई, डॉ. दिनेश दिनमणि, संतोष कुमार महतो, प्रियंका उरांव, बिनाधर सांडिल, सहदेव महतो, जगदीश उरांव, शकुंतला बेसरा, परशुराम मानकी, सरफोज हेमरम, कृष्ण हेमरम, विक्की मिंज, राजीव पांडोराम हाइबुरू, संखराम उरांव, लेबिन मुंडू, डॉ. वसंत कुमार, महेंद्र शंखवार, प्रो. लखेन्दर मुंडा सहित अनेक शिक्षाविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। मोर्चा ने राज्य सरकार से निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं।
प्रमुख मांगें
- क्लस्टर सिस्टम से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को बाहर रखा जाए तथा सभी संचालित विषयों की पढ़ाई यथावत जारी रहे।
- विद्यालयों में क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषा के शिक्षकों के पद सृजित कर विषयवार नियुक्ति की जाए।
- केजी से पीजी तक झारखंडी भाषाओं की पढ़ाई सुनिश्चित की जाए तथा प्रत्येक विश्वविद्यालय में पृथक भाषा विभाग स्थापित हों।
- भाषा संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पृथक बजट और समग्र झारखंडी भाषा नीति बनायी जाये।
- बीएड महाविद्यालयों में भाषा कोटा एवं लैंग्वेज लैब स्थापित हों।
- छात्रवृत्ति, शोध सहायता एवं छात्र कल्याण कोष की व्यवस्था हो।
- भाषा साहित्य का मानकीकरण, पाठ्यपुस्तक प्रकाशन एवं डिजिटल अभिलेखीकरण किया जाए।
- प्रत्येक शिक्षण संस्थान में अखड़ा एवं भाषा-संस्कृति उत्सव आयोजित हों तथा जिला स्तर पर कला-संगीत प्रशिक्षण केंद्र स्थापित हों।
- प्रशासन एवं न्याय व्यवस्था में भाषाई सुविधा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में झारखंडी भाषाओं का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।
- झारखंड भाषा-साहित्य अकादमी की स्थापना की जाए।
- कुड़ुख, मुंडारी, हो, खड़िया, नागपुरी, कुरमाली, खोरठा एवं पंचपरगनिया को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए प्रभावी पहल हो।
- जनगणना में भाषाओं के नाम एवं कोड की विसंगतियां दूर हों तथा नागपुरी भाषा का मानकीकृत नाम दर्ज किया जाए।
- निजी एवं केंद्रीय विद्यालयों में झारखंडी भाषाओं की पढ़ाई और भाषा फिल्मों के निर्माण को प्रोत्साहन मिले।
यात्रा का समापन मोरहाबादी स्थित रांची विश्वविद्यालय दीक्षांत मंडप में राष्ट्रगान के साथ किया गया। मौके पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक झारखंडी भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन, पढ़ाई, शिक्षक नियुक्ति एवं अधिकारों से जुड़ी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।
मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यह किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि झारखंड की भाषा, संस्कृति, परंपरा और अस्मिता की रक्षा का सामूहिक जनआंदोलन है। सरकार से सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की गई।