गांव का राज्य, गांव का समाज पेसा से मिला स्वराज : सांसद
समाहरणालय मैदान में 120 गांवों की पारंपरिक ग्राम सभा का शपथ ग्रहण
मुख्य अतिथि बने सांसद सुखदेव भगत
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। समाहरणालय मैदान में आज पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था, लोहरदगा के तत्वावधान में पारंपरिक ग्राम सभा का भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में जिले के 120 ग्रामों के पाहन, पुजारी, मुंडा, मानकी और हजारों ग्रामीण उपस्थित थे। कार्यक्रम में लोहरदगा लोकसभा के सांसद सुखदेव भगत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
मौके पर सांसद श्री भगत ने पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को नमन करते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो स्वशासन की व्यवस्था बनायी है, उस पर हमें गर्व करना चाहिए। सांसद ने कहा कि हमें अपनी रीति-रिवाज और परंपरा पर गर्व होना चाहिए। याद रखिए, पेसा कानून संसद से पास किया गया कानून है। लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा से बड़ा अगर कोई सदन है, तो वह ग्राम सभा है। ग्राम सभा को यह ताकत पेसा ने दी है।
पेसा कानून के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि 24 दिसंबर 1996 को भूरिया कमेटी की रिपोर्ट संसद में पारित हुई थी। इस कमेटी में सांसद दिलीप सिंह भूरिया, विधायक बंदी उरांव, बीडी शर्मा, सांसद भूपेंद्र सिंह सहित अनेक विद्वान लोग शामिल थे, लेकिन इसे धरातल पर लागू होने में लगभग 30 वर्ष लग गये।
सांसद ने आगे कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2013 में भूमि अधिग्रहण कानून पास करवाकर आदिवासियों की जमीन की रक्षा की थी। उन्होंने कहा कि मैं सरना धर्म कोड लागू करने की मांग को पुरजोर ढंग से संसद में उठाया है। सरना मां के नाम पर संसद में शपथ ली जो संसद में पहली बार को लिया गया है। आदिवासियों का कोई राष्ट्रीय अवकाश नहीं है, यह होना चाहिए। यह हमारी पहचान का सवाल है।
केंद्र सरकार को आदिवासियों के पर्व-त्योहारों पर राष्ट्रीय छुट्टी घोषित करनी चाहिए। उन्होंने आदिवासी समाज के भीतर सुधार की बात भी बेबाकी से रखी। उन्होंने कहा कि हमारे कस्टमरी लॉ में महिलाओं का अधिकार नहीं है, इस पर समाज औरप्रशासन को सोचना होगा। सांसद ने ग्रामीणों से आह्वान किया कि जानकारी के अभाव में हम अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं।
हमें अपने समाज, अपने कानून की जानकारी लेनी चाहिए। सीएनटी क्या है, एसपीटी क्या है, पेसा का अधिकार क्या है, वन अधिकार क्या है इसकी जानकारी हर ग्रामीण को होनी चाहिए। तभी हम आगे बढ़ सकते हैं और अपने जल, जंगल, जमीन के अधिकार को ले सकते हैं। उन्होंने नवनिर्वाचित सभी ग्राम प्रधानों को बधाई देते हुए कहा कि वे परंपरा और संविधान दोनों की रक्षा करेंगे और वे हर कदम पर उनके साथ खड़े हैं।