- 12 घंटे के मजदूर आंदोलन के बाद झुका कंपनी प्रबंधन
- बकाया वेतन से लेकर PF-ESI, नियुक्ति पत्र एवं वेतन वृद्धि तक सभी मांगों पर लिखित सहमति
- देवेन्द्र नाथ महतो की चेतावनी – झारखंड में कंपनियों को ईस्ट इंडिया कंपनी जैसा रवैया छोड़ना होगा, मजदूरों का शोषण बर्दाश्त नहीं होगा
- मजदूरों का शोषण बर्दास्त नहीं करेंगे : देवेन्द्र नाथ महतो
टीम एबीएन, रांची। राँची के इरबा स्थित SFK Manufacturer / J1 कपड़ा फैक्ट्री में मजदूरों के बकाया वेतन एवं श्रमिक अधिकारों की मांग को लेकर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो के नेतृत्व में शनिवार सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक लगातार 12 घंटे जोरदार आंदोलन किया गया। आंदोलन में JLKM के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं सैकड़ों मजदूरों ने भाग लिया।
आंदोलन के दौरान कंपनी प्रबंधन के खिलाफ मजदूरों के शोषण, 3–4 महीने से वेतन भुगतान नहीं होने, नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र, वेतन पर्ची, PF, ESI एवं कार्यस्थल पर सुरक्षा सुविधाओं के अभाव को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया गया। लगातार 12 घंटे के आंदोलन के बाद देर रात कंपनी प्रबंधन की ओर से प्रबंधक आदर्श तिवारी के साथ वार्ता हुई। वार्ता के बाद मजदूरों की प्रमुख मांगों पर लिखित समझौता हुआ, जिसके पश्चात आंदोलन स्थगित किया गया।
लिखित समझौते में इन मांगों पर बनी सहमति
- बकाया वेतन भुगतान: सितंबर 2026 तक का संपूर्ण बकाया वेतन 4 से 5 नवंबर 2026 तक सभी मजदूरों को भुगतान किया जाएगा। इसमें वर्तमान में कार्यरत एवं नौकरी छोड़ चुके (रिजाइन दे चुके) मजदूर भी शामिल होंगे।
- अक्टूबर महीने का वेतन: अक्टूबर 2026 का वेतन 15 नवंबर 2026 तक भुगतान किया जाएगा।
- समय पर मासिक वेतन: आगे से प्रत्येक महीने की 10 तारीख तक सभी मजदूरों का वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
- बुनियादी श्रमिक दस्तावेज एवं सुविधाएं : एक महीने के अंदर सभी मजदूरों को नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र, वेतन पर्ची तथा पात्रता के अनुसार PF एवं ESI की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
- साप्ताहिक छुट्टी: मजदूरों को सप्ताह में एक दिन अवकाश दिया जाएगा। छुट्टी के दिन काम कराने तथा निर्धारित आठ घंटे से अधिक काम लेने की स्थिति में समझौते के अनुसार डबल हाजिरी दी जाएगी।
- मोबाइल क्षतिपूर्ति : आंदोलन के दौरान कंपनी के पदाधिकारियों द्वारा एक वाहन का मोबाइल तोड़े जाने के मामले में कंपनी प्रबंधन ने नया मोबाइल उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है।
- कौशल के आधार पर वेतन वृद्धि एवं पदोन्नति : श्रम विभाग द्वारा निर्धारित नियमों एवं लागू प्रावधानों के अनुसार अनस्किल्ड से सेमी-स्किल्ड, सेमी-स्किल्ड से स्किल्ड तथा स्किल्ड से हाईली स्किल्ड श्रेणी में योग्यता एवं कार्य के आधार पर ग्रेड प्रमोशन तथा वेतन वृद्धि की जाएगी।
- आंदोलनकारियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं : आंदोलन में शामिल किसी भी मजदूर या आंदोलनकारी को चिह्नित कर प्रतिशोध की भावना से नौकरी से हटाने, प्रताड़ित करने अथवा किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने पर सहमति बनी है। उक्त सभी बिंदुओं पर लिखित समझौते के बाद मजदूरों ने अपना आंदोलन स्थगित किया।
आंदोलन में शामिल JLKM के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता
इस आंदोलन में प्रमुख रूप से JLKM केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो, अल्पसंख्यक मोर्चा केंद्रीय उपाध्यक्ष मोहम्मद साकिर अंसारी, शाबिर अंसारी, आदिल अनवर, राँची जिला केंद्रीय महासचिव मार्सल महतो, बिराट महतो, जिला सचिव गजेंद्र महतो, राँची जिला वरीय उपाध्यक्ष रिहान अंसारी, प्रवक्ता महावीर साहू, ओरमांझी प्रखंड अध्यक्ष रामसेवक महतो, जगन्नाथ महतो, संतोष महतो, सुधांशु महतो, कोषाध्यक्ष राजू महतो सहित अन्य पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं सैकड़ों मजदूर शामिल हुए।
देवेन्द्र नाथ महतो ने कंपनियों को दी कड़ी चेतावनी
आंदोलन के बाद देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि झारखंड में उद्योग और कंपनियाँ चलाने वाले मालिकों एवं प्रबंधन को ईस्ट इंडिया कंपनी जैसा रवैया छोड़ना होगा। यह आजाद भारत है, जहाँ प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन तक सभी कानून के दायरे में आते हैं। फिर कंपनियाँ कानून से ऊपर कैसे हो सकती हैं?
उन्होंने कहा कि झारखंड के जल-जंगल-जमीन और मेहनतकश मजदूरों के श्रम से कंपनियाँ मुनाफा कमाती हैं, लेकिन उन्हीं मजदूरों को समय पर वेतन, न्यूनतम मजदूरी, बोनस, PF, ESI और सम्मानजनक कार्य वातावरण से वंचित रखना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि झारखंड में संचालित प्रत्येक कंपनी को श्रम विभाग द्वारा निर्धारित कानूनों एवं लागू श्रम संहिताओं का पालन करना होगा। मजदूरों को समय पर वेतन, उचित न्यूनतम मजदूरी, बोनस, सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षित कार्यस्थल और सम्मानजनक व्यवहार देना कंपनी प्रबंधन की जिम्मेदारी है।
देवेन्द्र नाथ महतो ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जो कंपनियाँ श्रम कानूनों का पालन नहीं करेंगी और मजदूरों का शोषण जारी रखेंगी, उनके विरुद्ध व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा। जरूरत पड़ी तो ऐसी कंपनियों के खिलाफ तालाबंदी का आंदोलन भी किया जाएगा और उन्हें झारखंड छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि मजदूरों का पसीना और मेहनत ही उद्योगों की असली पूँजी है। मजदूरों के अधिकारों से समझौता करके कोई भी कंपनी झारखंड में अपना कारोबार नहीं चला सकती।