केंद्र ने जनगणना तिथि घोषित की, लेकिन सरना धर्म कोड शामिल नहीं, यह आदिवासी अस्मिता और मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला : सांसद सुखदेव भगत
एबीएन सेंट्रल डेस्क (लोहरदगा/ नयी दिल्ली)। केंद्र सरकार ने जनगणना की तिथि की घोषणा कर दी है। यह जनगणना 25 जनवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक होगी। लेकिन अफसोस की बात है कि केंद्र सरकार ने अभी तक जनगणना कॉलम में सरना धर्म कोड को शामिल नहीं किया है। इसको लेकर लोहरदगा सांसद सह छत्तीसगढ़ प्रभारी सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। सांसद श्री भगत ने कहा कि सरना धर्म कोड के लिए वे बरसों से इस लड़ाई को लड़ते आ रहे हैं।
जब मैं विधायक था, तब मैंने इस मामले को विधानसभा में पुरजोर ढंग से उठाया था। जब मैं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष था, तब मैंने सरना धर्म कोड के मुद्दे को कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करवाया था। दिल्ली में जाकर मैंने स्वयं रजिस्ट्रार जनरल आॅफ इंडिया से मिलकर जनगणना कॉलम में सरना धर्म कोड शामिल करने की मांग की थी।
सांसद ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जनता से वादा किया था कि अगर मैं सांसद बना तो संसद में मेरा सबसे पहला प्रश्न जनगणना कॉलम में सरना धर्म कोड शामिल करने का होगा। सांसद बनने के बाद उन्होंने अपने वादे के मुताबिक संसद में सबसे पहले यही मांग उठायी। संसद में अपने वक्तव्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है और संविधान आदिवासी अस्मिता का रक्षक है।
भारत में करोड़ों आदिवासी निवास करते हैं, जिनकी धार्मिक परंपरा, पहचान और आस्था अलग है। सरकार द्वारा इसे मान्यता न देना उनके मौलिक अधिकार का हनन है। जनगणना में जब सभी धर्मों का कॉलम दिया गया है, तो आदिवासी जो प्रकृति के पुजारी हैं, जिनकी आस्था, पूजा पद्धति, विशेष रीति-रिवाज, परंपरा और संस्कृति है, उनकी रक्षा के लिए सरना धर्म कोड को क्यों शामिल नहीं किया गया? सांसद ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहाकिएक ओर सरकार जंगली जानवर, बाघ-शेरों की गिनती करती है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों आदिवासियों की धार्मिक पहचान को मिटाने पर तुली है। यह दोहरी नीति नहीं चलेगी।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष आदरणीय राहुल गांधी ने भी लोहरदगा संसदीय क्षेत्र के चुनावी दौरे में स्पष्ट कहा था कि केंद्र में इंडिया गठबंधन की सरकार बनते ही जनगणना कॉलम में सरना धर्म कोड शामिल किया जाएगा। झारखंड में महागठबंधन की सरकार ने विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज भी दिया है, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक इस पर कोई पहल नहीं की है। श्री भगत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनगणना शुरू होने में अब कुछ ही महीने बचे हैं।
उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लिया है। आदिवासियों की अस्मिता, उनकी पूजा पद्धति, रीति-रिवाज, परंपरा और संस्कृति की रक्षा के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। मैं इस मुद्दे को अब व्यापक स्तर पर संसद में फिर से उठाऊंगा। अगर केंद्र सरकार ने 25 जनवरी 2027 से शुरू हो रही जनगणना में सरना धर्म कोड लागू नहीं किया, तो पूरे देश में आदिवासी समाज भाजपा कि केंद्र सरकार को इसका करारा जवाब देगा।