टीम एबीएन, रांची। सीसीएल एनके एरिया के केडीएच परियोजना में निर्माण कार्य के दौरान करीब 100 फीट ऊंचे टावर से गिरकर मजदूर रामस्वरूप चौहान की मौत हो गयी। इस हादसे ने निर्माण स्थल पर मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था और कंपनी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। एक ओर परिवार ने अपना कमाऊ सदस्य खो दिया, वहीं दूसरी ओर हादसे के बाद हुए समझौते में कंपनी ने मृतक के आश्रितों को 25 लाख रुपये मुआवजा, पत्नी को नौकरी और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने पर सहमति जतायी है।
जानकारी के अनुसार, रामस्वरूप चौहान शिडा कंस्ट्रक्शन के अधीन संविदा कर्मी के रूप में सी-1 एवं सी-2 में कार्यरत थे। शनिवार सुबह करीब 9:40 बजे वे मधुकाम कंपनी के शैलो प्रोजेक्ट निर्माण कार्य के सिलसिले में लगभग 100 फीट ऊंचे टावर पर चढ़कर काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक वे नीचे गिर पड़े। गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौत हो गयी। घटना के बाद कार्यस्थल पर अफरा-तफरी मच गयी। मजदूर की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
सेफ्टी बेल्ट पहनने के बावजूद कैसे हुई मौत, सुरक्षा रस्सी टूटने का आरोप
हादसे को लेकर साथी कामगारों और प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि रामस्वरूप चौहान ऊंचाई पर काम करने के दौरान सेफ्टी बेल्ट पहने हुए थे, लेकिन बेल्ट से जुड़ी सुरक्षा रस्सी (लाइफलाइन रोप) अचानक टूट गयी। इसके कारण वे करीब 100 फीट नीचे जा गिरे। हालांकि, सुरक्षा रस्सी टूटने के आरोप की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यदि उपकरण की गुणवत्ता या रखरखाव में कमी सामने आती है, तो यह गंभीर लापरवाही का मामला होगा।
इस घटना ने कंपनी के सुरक्षा प्रबंधन पर कई अहम सवाल खड़े कर दिये हैं। आखिर ऊंचाई पर काम कराने से पहले सुरक्षा उपकरणों की गुणवत्ता की जांच किसने की थी? क्या सेफ्टी बेल्ट और उससे जुड़ी रस्सी का नियमित निरीक्षण किया गया था? क्या कार्यस्थल पर सुरक्षा अधिकारी की निगरानी में काम कराया जा रहा था? यदि सुरक्षा उपकरण ही मजदूर की जान बचाने में नाकाम रहे, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी? इन सवालों का जवाब कंपनी प्रबंधन को देना चाहिए।
25 लाख मुआवजा, पत्नी को नौकरी; 15 लाख की बीमा राशि अलग
हादसे के बाद 31 अक्टूबर को श्रमिक संघों एवं विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी मां हुई द्विपक्षीय वार्ता में मधुकॉन प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने मृतक के परिजनों को कुल 25 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमति जतायी। समझौते के अनुसार, पांच लाख रुपये तत्काल दिये जायेंगे, जबकि शेष 20 लाख रुपये तीन किस्तों में भुगतान किये जायेंगे।
इसके अलावा कर्मकार मुआवजा एवं बीमा के तहत करीब 15 लाख रुपये अलग से दिये जायेंगे। कंपनी मृतक की पत्नी नविता देवी को अकुशल श्रेणी में नौकरी देगी। वहीं, दाह संस्कार के लिए तत्काल 50 हजार रुपये नकद देने और मृतक के बच्चों की स्कूल फीस का पूरा खर्च उठाने पर भी सहमति बनी है।
मुआवजे के साथ हादसे की जांच और जवाबदेही भी जरूरी
समझौते से मृतक के परिवार को आर्थिक सहारा और भविष्य की सुरक्षा का भरोसा जरूर मिला है, लेकिन केवल मुआवजा देकर इस हादसे से जुड़े गंभीर सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आखिर 100 फीट ऊंचे टावर पर काम कर रहे मजदूर की सुरक्षा में कहां चूक हुई? क्या सुरक्षा उपकरणों की गुणवत्ता में कमी थी या कार्यस्थल पर निगरानी का अभाव था? इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सबसे जरूरी है कि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाकर जिम्मेदारी तय की जाये। निर्माण कार्य में उत्पादन और समयसीमा की अपनी अहमियत है, लेकिन मजदूरों की जान से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। अब देखना होगा कि कंपनी प्रबंधन सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।