धनबाद में कथित अवैध गर्भपात का मामला : डीसी से सिविल सर्जन तक सवाल, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की जवाबदेही कहां तक?
एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। गर्भ में बेटी होने की कथित जानकारी, गर्भपात की योजना और फिर महिला की मौत! धनबाद के कतरास में किरण देवी की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। कतरास के सेंट्रल डायग्नोस्टिक सेंटर से भ्रूण जैसे अवशेष मिलने के दावे के बाद अब सवाल सिर्फ एक सेंटर का नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य निगरानी तंत्र का है। आखिर धनबाद जिले में हो क्या रहा है? क्या अल्ट्रासाउंड केंद्रों और कथित अवैध गर्भपात की गतिविधियों पर निगरानी रखने वाला तंत्र केवल कागजों पर चल रहा है?
किरण देवी की मौत से जुड़े मामले में परिजनों ने आरोप लगाया है कि धनबाद के एक अल्ट्रासाउंड केंद्र में जांच के दौरान गर्भ में लड़की होने की जानकारी दी गयी थी। इसके बाद गर्भपात की योजना बनाये जाने की बात सामने आयी। हालांकि, संबंधित केंद्र की पहचान और इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच का विषय है।
जानकारी के मुताबिक, 28 अक्टूबर को कतरास थाना क्षेत्र स्थित सेंट्रल डायग्नोस्टिक सेंटर में कथित गर्भपात के दौरान किरण देवी की मौत हो गयी। परिजनों के अनुसार, उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां वह मृत अवस्था में थीं। मामले की जांच के दौरान सेंटर से भ्रूण जैसे कुछ अवशेष मिलने की जानकारी भी सामने आयी है।
थाना प्रभारी प्रवीण कुमार के मुताबिक, बरामद सामग्री को एफएसएल जांच के लिए भेजा जायेगा। पोस्टमार्टम और वैज्ञानिक जांच से ही मौत के कारणों तथा बरामद सामग्री की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से सवाल: आखिर निगरानी व्यवस्था कहां है?
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के सामने भी इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही का सवाल खड़ा किया है। जिले में अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण, निरीक्षण और पीसीपीएनडीटी कानून के पालन की निगरानी कैसे होती है? क्या संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की जाती है? यदि जांच में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण या अनधिकृत गर्भपात की पुष्टि होती है, तो संबंधित केंद्रों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी होगी?
मंत्री से यह सवाल पूछना जरूरी है कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और अवैध भ्रूण लिंग जांच पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है। हालांकि, इस मामले में मंत्री या विभाग की किसी प्रत्यक्ष भूमिका अथवा पूर्व जानकारी का अभी कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
डीसी और सिविल सर्जन से भी जवाबदेही तय करने की मांग
धनबाद के उपायुक्त और सिविल सर्जन को स्पष्ट करना चाहिए कि जिले में अल्ट्रासाउंड केंद्रों और गर्भपात कराने वाले संस्थानों की जांच कब और कैसे की जाती है। क्या सेंट्रल डायग्नोस्टिक सेंटर के पास संबंधित प्रक्रिया के लिए जरूरी अनुमति और सुविधाएं थीं? गर्भपात किसने किया? क्या संबंधित चिकित्सक योग्य और पंजीकृत था? कथित भ्रूण लिंग जांच किस केंद्र में हुई?इन सवालों के जवाब केवल बयान से नहीं, बल्कि दस्तावेजों, निरीक्षण रिपोर्ट और निष्पक्ष जांच से सामने आने चाहिए।
कानून सख्त, फिर भी उल्लंघन के आरोप क्यों?
पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत भ्रूण का लिंग बताना प्रतिबंधित है। पहली बार दोषसिद्ध होने पर तीन साल तक की कैद और 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। गैर-पंजीकृत चिकित्सक द्वारा गर्भपात कराने पर एमटीपी एक्ट के तहत दो से सात साल तक कठोर कारावास हो सकता है। यदि लापरवाही से मौत की पुष्टि होती है, तो परिस्थितियों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।
जवाब चाहता है कोयलांचल
किरण देवी की मौत ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि कथित अल्ट्रासाउंड केंद्र से लेकर गर्भपात की प्रक्रिया तक हर कड़ी की जांच हो। एफएसएल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम और चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर सच्चाई सामने लायी जाये तथा दोष साबित होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो।
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, धनबाद डीसी और सिविल सर्जन के सामने अब बड़ा सवाल है—क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच कर स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों को दूर किया जायेगा, या महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा यह गंभीर मामला भी कार्रवाई के इंतजार में रह जायेगा? धनबाद को जवाब चाहिए, जवाबदेही चाहिए और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम चाहिए।