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सात कुंडीय महायज्ञ में गूंजे वैदिक मंत्रोच्चार

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सात कुंडीय महायज्ञ में गूंजे वैदिक मंत्रोच्चार
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संस्कार और राष्ट्ररक्षा का लिया गया संकल्प : दीपक कुमार अग्रवाल 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। जिले में सनातन संस्कृति, वैदिक परंपरा और सामाजिक एकता को सशक्त बनाने के उद्देश्य से वनवासी रक्षा परिवार फाउंडेशन के तत्वावधान में विद्या मंदिर परिसर में सात कुंडीय महायज्ञ का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ संपन्न हुए इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धा, संस्कार और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता फाउंडेशन के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता ने की। महायज्ञ में फाउंडेशन के मुख्य संरक्षक शरद चंद आर्य एवं शास्त्री जी ने विधि-विधान के साथ मंत्रोच्चार कर अनुष्ठान संपन्न कराया। 

महायज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं ने यज्ञ कुंड में आहुति अर्पित कर समाज, राष्ट्र और जनकल्याण की भावना के साथ सामूहिक संकल्प लिया। पूरे आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, पारंपरिक संस्कारों और सनातन जीवन-पद्धति के प्रति जागरूक करना रहा। आयोजकों ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपरा है, जो व्यक्ति को आत्मानुशासन, सदाचार, सेवा और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराती है। 

मौके पर फाउंडेशन के अध्यक्ष अनिल गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय रक्षा-यज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से समाज में समता, समरसता और समर्पण की भावना जागृत करना है। उन्होंने कहा कि संस्कारवान व्यक्ति ही एक सशक्त परिवार, जागरूक समाज और मजबूत राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं में जीवन को सही दिशा देने की क्षमता है। 

आवश्यकता इस बात की है कि इन संस्कारों को केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित न रखकर अपने दैनिक जीवन और व्यवहार में भी उतारा जाये। उन्होंने कहा कि समाज में आपसी सद्भाव, सहयोग और एकता की भावना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। जब लोग व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देंगे, तभी एक संगठित एवं सशक्त समाज का निर्माण संभव होगा। 

कार्यक्रम के दौरान अपनी संस्कार पद्धति को समझने, सामूहिक अभ्यास को बढ़ावा देने तथा योग्य और अनुभवी कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन में समाजहित के कार्य करने पर विशेष बल दिया गया। सतीश जायसवाल ने कहा कि प्रत्येक यज्ञ के प्रारंभ में संस्कारों और परंपराओं के महत्व को समझना, सामूहिक रूप से सकारात्मक विचारों का अभ्यास करना तथा प्रेरक मार्गदर्शन प्राप्त करना आवश्यक है। 

अनुष्ठान के समापन पर सनातन संस्कारों का दैनिक जीवन में पालन करने और भगवान श्रीकृष्ण की धर्मरक्षा की नीति से प्रेरणा लेते हुए धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का सामूहिक संकल्प लिया गया। महायज्ञ के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया गया कि धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन भी आवश्यक है। समाज में परस्पर सम्मान, सहयोग, सेवा और सद्भाव की भावना विकसित कर ही सांस्कृतिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है। 

आयोजन में सतीश जसवाल, दीपक कुमार अग्रवाल, ओम प्रकाश गुप्ता, डॉ कुमुद अग्रवाल, जय गोविंद, शिव शंकर सिंह और सचिन कुमार सहित बड़ी संख्या में रामभक्त एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता निभायी और संस्कार, सामाजिक एकता तथा राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया है।

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