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धनबाद : बीआईटी सिंदरी की चहारदीवारी निर्माण पर सवाल

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धनबाद : बीआईटी सिंदरी की चहारदीवारी निर्माण पर सवाल
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  • घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप, पीएमओ पोर्टल की रिपोर्टिंग भी संदेह के घेरे में 
  • सरकारी धन से हो रहे निर्माण में गुणवत्ता से समझौते का आरोप, बीआईटी सिंदरी की बाउंड्री पर उठी जांच की मांग 
  • बीआईटी सिंदरी में निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर विवाद, मिट्टी और बालू के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल 
  • जमीन पर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल, पीएमओ पोर्टल पर शिकायत के निस्तारण की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, सिंदरी (धनबाद)। झारखंड के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान बीआईटी सिंदरी परिसर में चल रहे चहारदीवारी निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माण स्थल पर कथित तौर पर घटिया बालू और मिट्टी के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह न केवल निर्माण मानकों के अनुपालन, बल्कि संस्थान की सुरक्षा और सरकारी राशि के सदुपयोग से जुड़ा गंभीर विषय होगा। 

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को निर्माण स्थल पर की गई रिपोर्टिंग के दौरान निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाये गये। आरोप है कि कार्य में निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। ऐसे में निर्माण कार्य की तकनीकी जांच और इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण कराना आवश्यक हो गया है। 

पहले भी उठ चुके हैं निर्माण कार्यों में अनियमितता के मुद्दे 

बीआईटी सिंदरी में निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठने का यह पहला मामला नहीं बताया जा रहा है। मीडिया में पहले भी संस्थान में संचालित विभिन्न निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर समाचार प्रकाशित होता रहा है। उनका कहना है कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। 

पीएमओ पोर्टल पर शिकायत, रिपोर्टिंग की निष्पक्षता पर सवाल 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर पत्रकार नरेंद्र जोशी ने झारखंड के मुख्य सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज करायी थी। शिकायत के निस्तारण और उस पर अपलोड की गयी रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाये गये हैं।

आरोप है कि जमीनी स्थिति और शिकायत के जवाब में दी गयी जानकारी के बीच अंतर हो सकता है। यदि ऐसा है, तो संबंधित रिपोर्ट की सत्यता की स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए, ताकि शिकायत के निस्तारण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। हालांकि, पोर्टल पर दर्ज शिकायत, उस पर की गयी कार्रवाई और अपलोड की गयी रिपोर्ट की वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही की जा सकती है। 

विकास कार्यों के लिए आवंटित राशि के उपयोग पर निगरानी जरूरी 

बीआईटी सिंदरी जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान में आधारभूत संरचनाओं का निर्माण विद्यार्थियों की सुरक्षा और संस्थान की दीर्घकालिक जरूरतों से जुड़ा है। ऐसे कार्यों में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों का पालन और खर्च की पारदर्शिता सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है। 

यदि निर्माण में निर्धारित मानकों की अनदेखी की गयी है, तो इससे सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर प्रश्न उठ सकते हैं। इसलिए आवश्यक है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता का आकलन केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर नहीं, बल्कि स्थल निरीक्षण, सामग्री परीक्षण और तकनीकी जांच के माध्यम से किया जाये। 

निदेशक, ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग 

इस पूरे मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि निर्माण कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी या एजेंसी के पास है और निर्धारित मानकों के अनुपालन की जांच किस स्तर पर की जा रही है। संस्थान के निदेशक, संबंधित अभियंताओं, ठेकेदार तथा निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका का परीक्षण जांच के दौरान किया जा सकता है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या अधिकारी की जिम्मेदारी अथवा संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। 

निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की उठी मांग 

मामले को लेकर मांग की जा रही है कि बीआईटी सिंदरी की चारदीवारी निर्माण परियोजना का उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष तकनीकी निरीक्षण कराया जाये। निर्माण में इस्तेमाल की जा रही बालू, मिट्टी और अन्य सामग्रियों के नमूनों की जांच किसी सक्षम तकनीकी एजेंसी से करायी जानी चाहिए। इसके साथ ही, निर्माण से संबंधित स्वीकृत प्राक्कलन, कायार्देश, गुणवत्ता जांच रिपोर्ट और पीएमओ पोर्टल पर दर्ज शिकायत के निस्तारण से जुड़े अभिलेखों की भी समीक्षा की जानी चाहिए। 

यदि जांच में निर्माण मानकों के उल्लंघन, गलत रिपोर्टिंग या लापरवाही की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित विभाग इस मामले में जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं। बीआईटी सिंदरी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और शिकायतों के पारदर्शी निस्तारण को लेकर संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।

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