- श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनी महानवमी एवं विजयादशमी
- नौ कन्याओं का पूजन, शस्त्र आराधना एवं अन्नपूर्णा सेवा में सात हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
टीम एबीएन, रांची। रांची के पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम मंदिर में परमहंस डॉ. सदानंद महाराज जी के सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के तत्वावधान में महानवमी एवं विजयादशमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, कन्या पूजन, अन्नपूर्णा सेवा एवं पारंपरिक शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया। पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। महानवमी के अवसर पर मंदिर एवं श्री राधा रानी का अलौकिक श्रृंगार किया गया।
मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडेय ने विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई तथा भगवान को भोग अर्पित किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के माध्यम से प्रभु की आराधना की।धार्मिक परंपरा के अनुसार नौ कुंवारी कन्याओं का विधिवत पूजन कर उन्हें श्रद्धापूर्वक भोजन कराया गया तथा उपहार स्वरूप सामग्री प्रदान की गई।
महानवमी एवं विजयादशमी के अवसर पर ट्रस्ट की ओर से संचालित अन्नपूर्णा सेवा के अंतर्गत सब्जियों से युक्त खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया गया। दोनों दिनों में सात हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस सेवा आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना को भी सशक्त किया।
ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि विजयादशमी के दिन मंदिर में विधि-विधान के साथ पारंपरिक शस्त्र पूजन एवं भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। काठमांडू, नेपाल से पधारे श्रद्धालु भगवान श्रीराम एवं हनुमान जी के भजनों पर शस्त्रों के साथ उत्साहपूर्वक झूम उठे। ट्रस्ट की ओर से सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं को अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया,अरविंद अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, नंदकिशोर चौधरी, पवन पोद्दार, सुनीता अग्रवाल एवं संजय सर्राफ सहित ट्रस्ट के अनेक सदस्य तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। आयोजन ने धर्म, भक्ति, सेवा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का प्रेरणादायी संदेश दिया।