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हिंडाल्को के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ले संज्ञान : रीतेश कुमार

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हिंडाल्को के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ले संज्ञान : रीतेश कुमार
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  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल लें संज्ञान, पर्यावरण संतुलन बिगाड़ने एवं प्रदूषण फैलाने हेतु हिंडाल्को कंपनी के विरुद्ध हो कड़ी कार्रवाई : रीतेश कुमार, अध्यक्ष, लोहरदगा चैंबर आॅफ कॉमर्स 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोहरदगावासी जानते हैं कि हिंडाल्को द्वारा बॉक्साइट खन्नन एवं ढुलाई का काम लोहरदगा, गुमला जिला में अवस्थित विभिन्न माइंसों, जैसे बगड़ू, भुसाड़, हिसरी, पाखर, बिमरला, सेरेंगदाग, जालिम, सनई, अमतिपानी, गुरदरी, कुजाम, टाटीझरीया, कुदाग, सामरी इत्यादि में  धड़ल्ले से  लगातार लगभग 60-65 वर्षों से वैध 2लाख टन प्रति माह, अवैध कोई हिसाब नहीं,  बॉक्साइट उत्खन्न का काम एवं ढुलाई हिन्डाल्को कम्पनी द्वारा स्थापना काल से किया जा रहा है, परंतु सरकार द्वारा निर्धारित विभिन्न अधिनियमों  

  1. जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974,  
  2. जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) उपकर अधिनियम, 1977 
  3. वन (संरक्षण)अधिनियम, 1980 
  4. वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण)अधिनियम, 1981 
  5. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1980 
  6. जैव-विविधता अधिनियम, 2002 

का लगातार धज्जियां उड़ाते हुए अपना जेब गर्म करते आ रही है। जिस कारण लोहरदगा गुमला जिला का पर्यावरण संतुलन तहस नहस हो चुकी है और यहां की हवाओं में लाल मिट्टी का कण फैलकर इतना भयावह रूप ले चुका है कि आंख, कान, नाक, फेफड़ा, इत्यादि की बीमारी खासकर लोहरदगावासियों के लिए आम बात हो गयी है।  

लोहरदगा गुमला अवस्थित विभिन्न माइंस में धरती चीरकर उत्खन्न तो धड़ल्ले से हो रही है परन्तु  सरकार द्वारा निर्धारित विभिन्न मापदंडों जैसे सामाजिक दायित्व निर्वाहन, प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण संतुलन, जल,जंगल जमीन का रक्षा, जंगली जीव जंतुओं की सुरक्षा तथा शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था इत्यादि का पालन  केवल कागजों में औपचारिकता मात्र बनकर रह गयी है। 

मजदूरों और ट्रक मालिको का शोषण भी आम बात है, परंतु रोजी रोटी को लेकर मजबूरीवश इनका मुंह कंपनी के विरुद्ध नहीं खुल पाती है, जिस कारण कहीं न कहीं इनकी मजबूरी का फायदा हिंडाल्को द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से नियुक्त बिचौलियों द्वारा उठाने का कार्य किया जाता रहा है। अब यह महसूस भी होंने लगा है कि विभिन्न मुद्दों पर आन्दोलन केवल औपचारिकता मात्र बनकर रह गयी है! क्योंकि हिंडाल्को कम्पनी प्रबंधन द्वारा इसे मैनेज करना आम बात है। 

अब आवश्यक हो गया है कि हिंडाल्को कंपनी के गलत कारनामो के खिलाफ केंद्र व राज्य सरकार खुद कदम उठावे तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के माध्यम से लोहरदगा गुमला जिला में अवस्थित माइंसों की गहन  जांच हों तथा वहां के रैयतों से पूछताछ के माध्यम से उनकी शोषण की सच्चाई को उजागर करे।

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