17 साल से एएनओ नहीं होने से फंसा पेंच, रक्षा राज्य मंत्री से मिले कैडेट्स
ममता कुमारी
एबीएन न्यूज नेटवर्क, बुंडू (रांची)। पंच परगना क्षेत्र के प्रमुख डिग्री कॉलेज पीपीके कॉलेज, बुंडू की 7/3 एनसीसी कंपनी पिछले 6 महीने से निलंबित है। 16 अप्रैल 2025 से निलंबित इस यूनिट को स्थायी रूप से बंद किए जाने की आशंका को लेकर कैडेट्स और पूर्व छात्रों में आक्रोश है। यूनिट की बहाली के लिए कैडेट्स ने रांची के सांसद और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ से हस्तक्षेप की मांग की है।
मामले को लेकर कैडेट्स ने सांसद को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन के अनुसार, 3 झारखंड बटालियन एनसीसी, रांची द्वारा कॉलेज को दो नोटिस भेजे गये हैं। नोटिस में निलंबन का मुख्य कारण पिछले 17 वर्षों से कॉलेज में एसोसिएट एनसीसी आॅफिसर (एएनओ) की अनुपलब्धता बताया गया है।
कैडेट्स का कहना है कि पूर्व सीटीओ सब्रान सिंह मुंडा ने एएनओ पद के लिए जरूरी पीआरसीएन प्रशिक्षण नहीं लिया, जिससे पूरी यूनिट का कामकाज प्रभावित हुआ। इसका सीधा असर कैडेट्स की नियमित परेड और प्रशिक्षण पर पड़ा।
गोल्ड मेडल जीतकर भी मायूस हैं कैडेट्स
दिलचस्प बात यह है कि तमाम कठिनाइयों के बावजूद कॉलेज के कैडेट्स ने हाल ही में हुए सीएटीसी-आईआई कैंप में शानदार प्रदर्शन किया था। फायरिंग में स्वर्ण पदक और पायलटिंग में रजत पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की है।
वहीं कॉलेज की प्राचार्य डॉ. विनिता कुमारी ने यूनिट को बचाने के लिए कई प्रयास किये हैं। उन्होंने 3 झारखंड बटालियन के कमांडिंग आॅफिसर से करीब पांच बार मुलाकात की और कचहरी रोड स्थित एनसीसी ग्रुप कार्यालय में ग्रुप कमांडर से भी मिलीं। कॉलेज ने नव नियुक्त सीटीओ कल्याण रॉय के साथ अठड प्रशिक्षण के लिए जरूरी सभी दस्तावेज भी जमा कर दिए हैं, लेकिन इसके बाद भी निलंबन रद्द नहीं हुआ है।
ग्रामीण छात्रों के भविष्य पर संकट
पीपीके कॉलेज में आसपास के सैकड़ों गांवों के, खासकर आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्र पढ़ते हैं। ऐसे छात्रों के लिए एनसीसी ही सेना और सशस्त्र बलों में करियर का सबसे सुलभ जरिया है। यूनिट बंद होने से इन छात्रों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा।
एनसीसी कैडेट्स ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द बहाली नहीं हुई तो नये सत्र में नये प्रवेश भी बंद हो जायेंगे। कैडेट्स ने सांसद संजय सेठ से आग्रह किया है कि वे एनसीसी अधिकारियों से बात कर निलंबन की समीक्षा कराएं और यूनिट की बहाली सुनिश्चित करें।