आठ दिवसीय आयोजन में खेल, संस्कृति और प्रतिभा सम्मान ने छोड़ी अनूठी छाप, सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने की पहल भी बनी चर्चा का केंद्र
एबीएन न्यूज नेटवर्क, झुमरीतिलैया। उत्सव की रौनक, परंपराओं की मिठास और सामाजिक एकता का संदेश। झुमरीतिलैया में आयोजित आठ दिवसीय अग्रसेन जयंती समारोह ने इस बार केवल धार्मिक आयोजन तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज में समानता, भाईचारे और बदलाव की प्रेरक मिसाल भी पेश की। सामूहिक भोज की सदियों पुरानी गौठ परंपरा से लेकर विवाह में 11 रुपये देने की अनूठी पहल और मृत्यु भोज बंद करने के निर्णय तक, समारोह ने सामाजिक सुधार की दिशा में अग्रवाल समाज की सोच को सामने रखा।
अग्रसेन जयंती पर पूजा-अर्चना और शोभायात्रा के बाद आयोजित गौठ परंपरा में समाज के सभी परिवार एक साथ बैठकर शुद्ध शाकाहारी भोजन करते हैं। इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता। पूरी-सब्जी, दाल और मिठाई के साथ आयोजित सामूहिक भोज का उद्देश्य आपसी मेलजोल बढ़ाना और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करना है।
समाज ने आर्थिक समानता की दिशा में भी अनूठी पहल की है। पिछले दो दशकों से विवाह के अवसर पर लिफाफे और महंगे उपहारों की परंपरा के स्थान पर वर-वधू को 11 रुपये देने की व्यवस्था निभायी जा रही है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से सक्षम, मध्यम और कमजोर वर्गों के बीच उपहारों को लेकर होने वाले अंतर को समाप्त करना है। वहीं, पिछले वर्ष चर्चा के बाद समाज ने मृत्यु भोज की परंपरा बंद करने का निर्णय लिया।
अब ऐसे अवसरों पर परिवार और रिश्तेदार ही शामिल होते हैं तथा सामूहिक भोज की पुरानी व्यवस्था से दूरी बनायी गयी है। आठ दिवसीय समारोह में क्रिकेट प्रतियोगिता, बच्चों और महिलाओं के लिए खेल गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं के सम्मान ने आयोजन को खास बनाया। वहीं, शोभायात्रा में समाज की एकजुटता और उत्साह देखने को मिला।
समारोह को सफल बनाने में समाज के अध्यक्ष कैलाश चौधरी, सचिव संजीव खेतान, जयंती संयोजक मनोज पिलानिया, अंकित चौधरी, सह-संयोजक सरिका लड्डा, नेहा हिसारिया, प्रवक्ता अरविंद चौधरी सहित किशन संघई, प्रदीप केडिया, मनोज केडिया, प्रदीप खाटूवाला, संतोष लड्डा, विपुल चौधरी, संजय नरेडी, आयुष पोद्दार, संजय खेमानी, श्याम सुंदर सिंघानिया, महेश दारूका और संदीप हिसारिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।