- नाना पाटेकर का निधन भारतीय सिनेमा और राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति : संजय सर्राफ
टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता, फिल्मकार एवं प्रखर राष्ट्रवादी व्यक्तित्व नाना पाटेकर के आकस्मिक निधन पर गहरी शोक-संवेदना व्यक्त की है।
उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों एवं उनके असंख्य प्रशंसकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। संजय सर्राफ ने कहा कि नाना पाटेकर का निधन भारतीय कला, संस्कृति और सिनेमा के क्षेत्र में एक युग के अवसान जैसा है।
उन्होंने अपने विलक्षण अभिनय, प्रभावशाली संवाद अदायगी, दमदार आवाज, विशिष्ट शैली और बहुआयामी प्रतिभा से हिंदी एवं मराठी सिनेमा में अपनी ऐसी अलग पहचान बनाई, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।लगभग पांच दशकों के अपने शानदार फिल्मी सफर में उन्होंने अनेक चुनौतीपूर्ण और यादगार भूमिकाओं को जीवंत किया।
परिंदा, क्रांतिवीर, तिरंगा, प्रहार, सलाम बॉम्बे! सहित उनकी अनेक फिल्मों में उनका अभिनय दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ गया। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर को उनके उत्कृष्ट अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, फिल्मफेयर सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए तथा वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।
संजय सर्राफ ने कहा कि नाना पाटेकर केवल एक महान अभिनेता ही नहीं, बल्कि देश, समाज और किसानों के प्रति संवेदनशील व्यक्तित्व के रूप में भी याद किए जाएंगे। उनका निधन भारतीय फिल्म जगत के साथ-साथ पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिवार, मित्रों तथा करोड़ों प्रशंसकों को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।