- कमलेश कुमार सिंह के सौजन्य से जपला बना आस्था और सेवा का केंद्र
- पांचवें दिन लाखों श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
छोटा-सा जपला लेकिन इन दिनों बड़ी भीड़, बड़ी आस्था और बड़ी चर्चा का केंद्र - काली कंबल वाले बाबा का नि:शुल्क आरोग्य शिविर 8 अक्टूबर तक जारी रहेगा
एबीएन न्यूज नेटवर्क, हुसैनाबाद पलामू। कभी एक शांत और सीमित पहचान वाला शहर माना जाने वाला जपला इन दिनों आस्था, सेवा और श्रद्धा के बड़े केंद्र के रूप में नजर आ रहा है। शहर की बदली हुई तस्वीर और बढ़ी हुई चहल-पहल के केंद्र में है झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री कमलेश कुमार सिंह के सौजन्य से आयोजित काली कंबल वाले बाबा का नि:शुल्क आरोग्य शिविर। 1 अक्टूबर से शुरू हुआ यह शिविर 8 अक्टूबर तक चलेगा।
आज शिविर का पांचवां दिन है और आयोजकों के अनुसार, पांचवें दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु और मरीज जपला पहुंच रहे हैं। सुबह से ही शिविर स्थल पर लोगों की लंबी कतारें और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखने को मिल रही है। पलामू के विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ आसपास के इलाकों से लोग ट्रेन, बस और निजी वाहनों से जपला पहुंच रहे हैं। जपला रेलवे स्टेशन पर भी बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही देखी जा रही है।
शहर की सड़कों पर बढ़ती भीड़ और वाहनों की संख्या ने जपला के पूरे माहौल को बदल दिया है। इन दिनों जपला की तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आ रही है। रेलवे स्टेशन से लेकर मुख्य बाजार और शिविर स्थल तक हर तरफ बाहर से आने वाले लोगों की चहल-पहल है। एक छोटे से शहर में इतने बड़े स्तर पर लोगों का जुटना जपला के लिए भी एक अलग अनुभव बन गया है। इस पूरे आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री कमलेश कुमार सिंह।
उनके सौजन्य से आयोजित इस नि:शुल्क आरोग्य शिविर का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना और समाज के अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ उपलब्ध कराना है। शिविर में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के साथ-साथ काली कंबल वाले बाबा के दर्शन और आशीर्वाद के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि जपला इन दिनों केवल एक स्थानीय शहर नहीं, बल्कि आस्था और सेवा के एक बड़े केंद्र के रूप में दिखाई दे रहा है।
कमलेश कुमार सिंह के सौजन्य से आयोजित इस शिविर ने जपला के माहौल में एक नई ऊर्जा और चहल-पहल पैदा कर दी है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण शहर की गतिविधियां बढ़ी हैं और जपला की चर्चा अब आसपास के क्षेत्रों में भी हो रही है। छोटा-सा जपला लेकिन इन दिनों बड़ी भीड़, बड़ी आस्था और बड़ी चर्चा का केंद्र बन गया है।