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धनबाद : सिविल कोर्ट कर्मियों के लिए बनेगा मल्टीस्टोरी आवासीय भवन

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धनबाद : सिविल कोर्ट कर्मियों के लिए बनेगा मल्टीस्टोरी आवासीय भवन
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  • धनबाद : सिविल कोर्ट कर्मियों के लिए बनेगा मल्टीस्टोरी आवासीय भवन
  • दो एकड़ जमीन की तलाश तेज

एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। सिविल कोर्ट धनबाद के कर्मियों के लिए मल्टीस्टोरी आवासीय भवन बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रस्तावित आवासीय परिसर के निर्माण के लिए करीब दो एकड़ जमीन की आवश्यकता बताई गई है। भूमि उपलब्ध कराने को लेकर भवन प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ने उपायुक्त को पत्र भेजकर उपयुक्त सरकारी जमीन चिह्नित करने का अनुरोध किया है।

प्रारंभिक तौर पर रणधीर वर्मा चौक स्थित बजरंगबली मंदिर के पीछे की जमीन को संभावित स्थल के रूप में प्रस्तावित किया गया है। हालांकि, यह अंतिम स्थल नहीं है। प्रशासन यदि दो एकड़ की कोई अन्य उपयुक्त जमीन चिह्नित करता है तो उसी स्थान पर सिविल कोर्ट कर्मियों के लिए मल्टीस्टोरी आवासीय भवन का निर्माण किया जा सकता है।

भवन प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता चंदन कुमार की ओर से उपायुक्त को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सिविल कोर्ट धनबाद के कर्मियों के लिए मल्टीस्टोरी आवासीय भवन निर्माण को लगभग दो एकड़ भूमि की आवश्यकता है। प्रस्तावित निर्माण कार्य को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए उपयुक्त भूमि को चिह्नित कर उपलब्ध कराना जरूरी है।

बजरंगबली मंदिर के पीछे जमीन पर नजर

प्रशासन के समक्ष रखे गए प्रस्ताव में रणधीर वर्मा चौक स्थित बजरंगबली मंदिर के पीछे की जमीन को संभावित स्थल बताया गया है। यह इलाका शहर के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल है। हालांकि, भवन प्रमंडल के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्माण के लिए इसी जमीन का चयन अनिवार्य नहीं है।

कार्यपालक अभियंता चंदन कुमार के अनुसार, यदि प्रशासन को शहर में किसी अन्य स्थान पर करीब दो एकड़ की अधिक उपयुक्त जमीन मिलती है तो वहां भी आवासीय परिसर का निर्माण कराया जा सकता है। यानी फिलहाल प्राथमिकता उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराने की है, अंतिम स्थल चयन की प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर तय होगी।

जमीन मिलेगी, तभी बनेगा एस्टीमेट

फिलहाल प्रस्तावित मल्टीस्टोरी भवन की निर्माण लागत तय नहीं हुई है। न तो डीपीआर तैयार हुआ है और न ही भवन निर्माण का विस्तृत एस्टीमेट बनाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, जमीन चिह्नित होने के बाद ही भवन की जरूरत, डिजाइन, निर्माण क्षेत्र और अन्य तकनीकी पहलुओं का आकलन किया जाएगा।

इसके बाद निर्माण कार्य की अनुमानित लागत का एस्टीमेट तैयार होगा और स्वीकृति समेत आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ऐसे में फिलहाल पूरी योजना भूमि चिह्नित किए जाने के चरण में है।

प्रशासन के निर्णय पर टिकी अगली कड़ी

सिविल कोर्ट कर्मियों के लिए आवासीय सुविधा विकसित करने की इस योजना में अब सबसे अहम कदम जमीन का चयन है। भवन प्रमंडल ने उपायुक्त से उपयुक्त भूमि चिह्नित करने का अनुरोध किया है। प्रशासन की ओर से जमीन उपलब्ध कराए जाने के बाद ही आवासीय भवन की डिजाइन और निर्माण लागत से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

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