- रील से रियल लाइफ तक रोटेरियनों ने दिखाया जीवन का सच
- रोटेरियन बने नाटक के किरदार।
- हंसी के मंच से निकली जिंदगी की गंभीर सीख।
टीम एबीएन, रांची। रोटरी क्लब रांची के तत्वावधान में आयोजित विशेष कार्यक्रम में क्लब के सदस्य ही कलाकार बने और अलग-अलग किरदार निभाकर हास्य-व्यंग्य से भरपूर नाट्य प्रस्तुति दी। सदस्यों की सहज अदाकारी और संवाद ने दर्शकों को खूब हंसाया। वहीं कई प्रसंगों ने जीवन और जिम्मेदारी को लेकर गंभीर संदेश भी दिया।
नाटक की शुरुआत रोटरी बैठक में सदस्यों के समय पर नहीं पहुंचने और तरह-तरह के बहाने बनाने से हुई। ट्रैफिक जाम से लेकर घर से निकलने में देरी और काल्पनिक लिफ्ट में फंसने जैसे प्रसंगों के जरिए समय की पाबंदी पर चुटीला संदेश दिया गया। वहीं बैठक के संदेश में ‘डिनर एंड फेलोशिप’ लिखे जाने के बाद मेन्यू पूछने वाले प्रसंग ने खूब हंसाया।
क्लब की बैठकों की गतिविधियों, फाइन बॉक्स, औपचारिकताओं और सदस्यों की आपसी बातचीत को भी हास्य के अंदाज में प्रस्तुत किया गया। चूहे के मंच पर आने और उसे पकड़ने के लिए बायलॉज का सहारा लेने वाला प्रसंग खासा मनोरंजक रहा। अवॉर्ड की सिफारिश और सीएसआर को लेकर बातचीत के जरिए क्लब की कार्यप्रणाली पर हल्का-फुल्का व्यंग्य किया गया। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को भी नाटक में रोचक ढंग से दिखाया गया। मुख्य वक्ता की एंट्री से पहले रील के लिए सही शॉट लेने की कोशिश के जरिए सोशल मीडिया पर दिखावे की प्रवृत्ति पर व्यंग्य किया गया।
नाटक का सबसे प्रभावशाली हिस्सा जीवन की सच्चाई रहा। इसमें बताया गया कि इंसान पूरी जिंदगी घर, गाड़ी, पैसा और सम्मान जुटाने में लगा रहता है, लेकिन अंततः महत्वपूर्ण यह है कि उसने दूसरों के लिए क्या किया। सलाह, जवाब और उधार सोच-समझकर देने तथा चरित्र, ज्ञान और मर्यादा को महत्व देने का संदेश दिया गया।
नाटक में दिलचस्प मोड़ तब आया जब असली वक्ता पहुंचा और पता चला कि जिसे मुख्य वक्ता समझा जा रहा था, वह वास्तव में ड्राइवर था। इसके बावजूद उसके अनुभव से निकली बातें इतनी प्रभावशाली रहीं कि असली वक्ता ने भी कहा कि केवल ज्ञान बांटना ही नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारना जरूरी है।
इस नाटक का लेखन एवं निर्देशन रोटरी राँची के अध्यक्ष ललित त्रिपाठी ने किया जिसमें सुरेश साबू ने पान सिंह, अजय दीप वाधवा ने रामलाल, भावना तनेजा ने बाँसुरी देवी, निशी जायसवाल ने फूलन देवी, ललित त्रिपाठी ने बिजॉय जी, प्रवीण राजगढ़िया ने उद्धंड सिंह, मनीष रामसिसरिया ने गड़बड़दास, शालिनी सिंघानिया ने इंस्टा देवी, राजीव मोदी ने चतुरानंद जी, बिनोद कुमार ने जामेश्वर जी, पवन जायसवाल ने ज्ञानचंद, विनय छापरिया फनी सिंह एवं अपराजिता ने रुक्मिणी देवी का किरदार निभाया।