टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 21 जनवरी 2022 को भू माफियाओं के द्वारा अवैध रूप से जमीन पर कब्जा किए जाने के खिलाफ शतरंजी बगीचा में सुश्री मदिया तिर्की की अध्यक्षता में एक बैठक की गई। इस बैठक में खाता संख्या 122 के प्लॉट संख्या 696 कुल रकबा 1 एकड़ 63 डिसमिल, प्लॉट संख्या 1002 कुल रकबा 3 एकड़ 37 डिसमिल एवं प्लॉट संख्या 1005 कुल रकबा 13 डिसमिल परती कदीम जमीन पर भू -माफियाओं द्वारा अवैध रूप से कब्जा करने के खिलाफ विभिन्न आदिवासी संगठनों एवं ग्रामीणों की एक बैठक हुई। इस बैठक में कहा गया कि किसी भी कीमत पर भू माफियाओं को इन जमीनों को नहीं लेने दिया जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो भू माफियाओं को ग्रामीणों और आदिवासी समाज सबक सिखायेगा। साथ ही शतरंजी बस्ती जिसे एचईसी द्वारा अधिग्रहण कर लिया गया था और जिसके एवज में एचईसी के द्वारा 145 विस्थापित परिवारों को बसाने हेतु 1959-60 में नया शतरंजी बसाया गया, लेकिन एचईसी द्वारा इन विस्थापितों को जमीन का गलत कागज दिया गया, यही कारण है कि आज भी विस्थापित परिवार के लोग उस जमीन के सही कागजात को लेकर एचईसी प्रशासन और अंचल कार्यालय के बीच दर-दर की ठोकरें खाने पर विवश है इस संबंध में विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस समस्या को लेकर जल्द ही एचईसी प्रशासन एवं जिला प्रशासन से मिलेंगे और विस्थापितों को जो गलत पट्टा दिया गया है उस पर सुधार करने हेतु आग्रह करेंगे े इसके साथ ही वहां उपस्थित सभी लोगों ने गैरमजरूआ जमीन को बचाने का संकल्प लिया तथा भू माफियाओं द्वारा अबे ध्यान से जमीन लूट लिए जाने के खिलाफ एकजुट रहने का भी संकल्प लिया इस बैठक में मुख्य रूप से आदिवासी महासभा के संयोजक सह पूर्व मंत्री श्री देव कुमार धान, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की अध्यक्ष सह पूर्व मंत्री श्रीमती गीताश्री उरांव, आदिवासी जन परिषद के अध्यक्ष श्री प्रेमशाही मुंडा, झारखंड संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष श्री अंतू तिर्की, झारखंड क्षेत्रीय पड़हा समिति हटिया के अध्यक्ष अजीत उरांव, आदिवासी अधिकार मंच के महासचिव प्रफुल्ल लिंडा, सुशीला सामंत, पूर्व पार्षद धरमू लिंडा, बुधवा मुंडा, पूर्व मुखिया निकोलस एक्का, पार्षद निर्मला गाड़ी समेत सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।