- बाघमारा में अवैध कोयले का महाखेल, सीआईएसएफ की रेड से खुली पोल
- बाघमारा थाना प्रभारी को भनक तक नहीं! केसरगढ़ में छापेमारी से मचा हड़कंप
- हजारों टन कोयला व जनरेटर बरामद; स्थानीय पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
एबीएन न्यूज नेटवर्क, बाघमारा/धनबाद। धनबाद जिले के बाघमारा अनुमंडल क्षेत्र में अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की कार्रवाई से हड़कंप मच गया। केसरगढ़ इलाके में CISF की अचानक हुई छापेमारी के दौरान खुले स्थान पर बड़ी मात्रा में कोयला भंडारित पाया गया। मौके से जनरेटर समेत अन्य सामान भी जब्त किए जाने की बात सामने आई है।
कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। जिस इलाके में बड़े पैमाने पर कोयला भंडारण और अवैध गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई, वहां स्थानीय थाना पुलिस को इसकी जानकारी थी या नहीं यह जांच का विषय बन गया है।
CISF की कार्रवाई से खुली अवैध कारोबार की पर
केसरगढ़ क्षेत्र में CISF की टीम ने छापेमारी कर खुले स्थानों पर रखे भारी मात्रा में कोयले को चिह्नित किया। कार्रवाई के दौरान एक बड़ा जनरेटर भी बरामद किया गया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि यदि वहां लंबे समय से गतिविधियां संचालित थीं, तो स्थानीय स्तर पर इसकी निगरानी कैसे होती रही। हालांकि, पूरे मामले में बरामद कोयले की वास्तविक मात्रा, उसके स्रोत और इसके पीछे शामिल लोगों की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय पुलिस की मौजूदगी पर भी सवाल CISF की कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस के सहयोग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि छापेमारी में स्थानीय पुलिस की मौजूदगी या सहयोग नहीं था, तो इसके कारणों को लेकर भी जांच की जरूरत है। मामले में थाना स्तर पर निगरानी और गश्ती व्यवस्था की भी समीक्षा किए जाने की मांग उठ सकती है।
धनबाद एसएसपी द्वारा थानों और ओपी की गश्ती व्यवस्था मजबूत करने के लिए नई गाड़ियां उपलब्ध कराए जाने के बावजूद यदि इस तरह की गतिविधियां चलने की शिकायत सामने आती है, तो यह पुलिस की निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि केसरगढ़ में इतनी बड़ी मात्रा में कोयला आखिर आया कहां से? इसका मालिक कौन है? इसे कहां भेजा जाना था? और यदि गतिविधियां लंबे समय से चल रही थीं तो स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
पूरे मामले में CISF की कार्रवाई के बाद अब जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की जांच पर लोगों की नजर है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस कथित अवैध कारोबार के पीछे कौन लोग थे और उनकी गतिविधियों का वास्तविक नेटवर्क कितना बड़ा था।