- धनबाद : तोपचांची में कतरी नदी पर अवैध पुल का खेल!
- जांच टीम के सामने हंगामा, किसकी शह पर चल रहा माइंस-क्रशर?
- कतरी नदी पर कथित अवैध पुल की जांच करने पहुंची जिला परिषद उपाध्यक्ष
- क्रेसर संचालक पर डराने-धमकाने का आरोप
एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। तोपचांची प्रखंड के कालाझार में पत्थर क्रेसर और खदान से जुड़ी शिकायत की जांच करने पहुंची जिला परिषद की उपाध्यक्ष सरिता देवी को कथित तौर पर डराने-धमकाने का मामला सामने आया है।
आरोप है कि क्रेसर संचालक और उसके कुछ सहयोगियों ने जांच के दौरान जिला परिषद उपाध्यक्ष सरिता देवी और गिरिडीह सांसद प्रतिनिधि सुभाष रवानी से उलझने की कोशिश की। इसके बाद मौके पर माहौल बिगड़ गया और जांच की कार्रवाई प्रभावित हुई।
मामला कतरी नदी पर कथित अवैध पुल निर्माण और पत्थर खदान में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायत का है। जिला परिषद उपाध्यक्ष सरिता देवी ने इस संबंध में लिखित शिकायत की थी। शिकायत के बाद प्रशासन की ओर से मामले की जांच के लिए एक कमिटी गठित की गई थी।
जांच के लिए मौके पर पहुंची थी कमिटी
शुक्रवार को जांच कमिटी कालाझार स्थित संबंधित क्षेत्र में पहुंची। कमिटी में DMO राकेश तिग्गा, तोपचांची CO नूपुर कुमारी समेत अन्य अधिकारी शामिल थे। जिला परिषद उपाध्यक्ष सरिता देवी भी कमिटी की सदस्य के रूप में मौके पर पहुंचीं।
बताया गया कि जांच के दौरान क्रेसर संचालक और उसके कुछ सहयोगियों की ओर से सरिता देवी और सांसद प्रतिनिधि सुभाष रवानी के साथ बहस की स्थिति बन गई। आरोप है कि उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। इसके बाद मौके पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई और जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई।
हालात बिगड़ने के बाद जिला परिषद उपाध्यक्ष को मौके से लौटना पड़ा। मामले में अब यह सवाल उठ रहा है कि जिस शिकायत की जांच के लिए प्रशासनिक कमिटी गठित की गई थी, उसी जांच के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष के प्रतिनिधि को ही कथित तौर पर विरोध और धमकी का सामना क्यों करना पड़ा।
कतरी नदी पर कथित अवैध पुल का भी मुद्दा
शिकायत का एक प्रमुख बिंदु कतरी नदी पर कथित तौर पर बनाए गए पुल से जुड़ा है। आरोप है कि नदी में ओबी पत्थर और सीमेंट के पाइप डालकर रास्ता बनाया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस निर्माण में पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं किया गया।
कतरी नदी धनबाद के कोयलांचल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत मानी जाती है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नदी से आसपास की बड़ी आबादी की आजीविका जुड़ी हुई है और इसका स्थानीय जैव-विविधता पर भी असर पड़ता है।
मामले में अब प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नदी पर निर्माण नियमों के अनुरूप है या नहीं और खदान-क्रेसर संचालन में NGT अथवा अन्य पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
वहीं, जिला परिषद उपाध्यक्ष के साथ कथित तौर पर डराने-धमकाने की घटना को लेकर भी कार्रवाई की मांग उठ रही है। क्रेसर संचालक या संबंधित पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है।