विश्वास में दृढ़ता, प्रेम में प्रकाश और सेवा में एकजुटता का संदेश
टीम एबीएन, रांची। काउंसिल आॅफ काथलिक विमेन आॅफ इंडिया (सीसीडब्ल्यूआई) का 26वां राष्ट्रीय सम्मेलन गुरुवार को रांची स्थित जेवियर इंस्टीट्यूट आॅफ सोशल सर्विस (आईएसएस) में शुरू हुआ। चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का विषय है- आज की महिलाएं : विश्वास में दृढ़ जड़ें, प्रेम में प्रकाशमान और सेवा में एकजुट।
देश के विभिन्न भागों से आई काथलिक महिला प्रतिनिधियां इस सम्मेलन में भाग ले रही हैं। सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं को अपने विश्वास में दृढ़ बनाने, उनके मानवीय एवं सामाजिक योगदान को प्रोत्साहित करने तथा कलीसिया और समाज की सेवा में उनकी सक्रिय भागीदारी को और मजबूत करना है।
सम्मेलन का उद्घाटन पवित्र यूखरिस्त समारोह के साथ हुआ। रांची के महाधर्माध्यक्ष आर्चबिशप विन्सेंट आइंद मुख्य याजक थे। खूंटी के बिशप विनय कंडुलना, सीबीसीआई के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी फादर मैथ्यू कोझिकल, फादर बिशु बेंजामिन आइंद तथा फादर जॉन बरला सह-याजक के रूप में सहभागी हुए। समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए महिला प्रतिनिधि, धर्मगुरु, धर्मबहनें तथा आमंत्रित अतिथि उपस्थित थे।
अपने प्रवचन में आर्चबिशप विन्सेंट आइंद ने सुसमाचार में वर्णित राजा हेरोद का उल्लेख करते हुए कहा कि येसु के कार्यों और चमत्कारों के बारे में सुनकर हेरोद भयभीत हो गया था। बाहरी रूप से शक्तिशाली दिखाई देने के बावजूद वह भीतर से अशांत था। उन्होंने कहा कि जब अंत:करण सत्य से दूर और अशुद्ध हो जाता है, तब मनुष्य के भीतर शांति नहीं रहती। इसके विपरीत, येसु सत्य, प्रेम और शांति का संदेश देते हैं।
उन्होंने उपस्थित लोगों से अपने अंत:करण को शुद्ध रखने, सत्य को स्वीकार करने, ईश्वरीय विश्वास में गहराई से जुड़े रहने तथा नि:स्वार्थ भाव से मानवता की सेवा करने का आह्वान किया। आर्चबिशप ने कहा कि महिलाओं को ईश्वरीय विश्वास में गहराई से जड़ें जमाते हुए स्वयं प्रकाशमान बनना और उस प्रकाश से मानवता की सेवा करना चाहिए।
सीबीसीआई के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी फादर मैथ्यू कोझिकल ने भी सम्मेलन को संबोधित किया और महिलाओं की भूमिका तथा कलीसिया के जीवन में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीषा टोपनो ने अतिथियों एवं देश के विभिन्न हिस्सों से आये महिला प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने स्थापना की अवधारणा, उसकी गतिविधियों और सेवा-कार्यों की जानकारी देते हुए सम्मेलन के विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर उउहक की विभिन्न गतिविधियों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म प्रस्तुत की गयी। अतिथियों ने सम्मेलन के स्मारिका का भी विमोचन किया। सम्मेलन के माध्यम से महिलाओं को अपनी इसाई पहचान और आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े रहते हुए प्रेम, करुणा और सेवा की भावना के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
सम्मेलन में इस बात पर भी जोर दिया जा रहा है कि महिलाएँ परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ कलीसिया, समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी सक्रिय एवं रचनात्मक भूमिका निभायें। इस राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी संयुक्त रूप से राँची, जमशेदपुर, गुमला, खूंटी, सिमडेगा और डाल्टनगंज धर्मप्रांतों के डायोसिसन महिला संघों द्वारा की जा रही है। सम्मेलन में विभिन्न धर्मप्रांतों की महिला समितियां और स्थानीय सहयोगी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
चार दिनों तक चलने वाला यह सम्मेलन देशभर की काथलिक महिलाओं को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है, जहां वे अपने विश्वास, अनुभव, चुनौतियों और सेवा-कार्यों को साझा करते हुए भविष्य की दिशा पर सामूहिक रूप से विचार करेंगी। सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं में विश्वास, प्रेम, एकता और सेवा की भावना को नयी ऊर्जा प्रदान करना है।