150 वर्ष पर विशेष कार्यक्रम आयोजित
एबीएन न्यूज नेटवर्क, खूंटी। वंदे मातरम् गीत के 150वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भगतसिंह चौक पर पद्म सरिता आध्यात्मिक दर्शन संघ के तत्वावधान में शुक्रवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें उपस्थित देशप्रेमियों ने कहा कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् इस वर्ष अपने 150 वर्ष पूरे कर रहा है। 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के दिन बंकिम चंद्र चटर्जी ने इस कालजयी गीत की रचना की थी, जो बाद में उनकी प्रसिद्ध कृति आनंदमठ के भाग के रूप में साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में प्रकाशित हुआ था।
कार्यक्रम में विशेष रूप में उपस्थित पद्म सरिता आध्यात्मिक दर्शन संघ के अध्यक्ष डॉ दीपक कुमार घोष ने कहा कि भारत सरकार ने 7 नवंबर 2025 को नयी दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में इस ऐतिहासिक अवसर पर एक साल तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव की शुरुआत की।
इस दौरान एक स्मारक डाक टिकट और विशेष सिक्का भी जारी किया गया। यह समारोह 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान देश के सभी जिलों, पंचायतों, स्कूल-कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों में सामूहिक गायन, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
मुरहू के देशप्रेमी -समाजसेवी डॉ धर्मेंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि वंदे मातरम् यानी मां, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूं पहली बार रवींद्रनाथ टैगोर ने 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में इसे गाया था। 7 अगस्त 1905 को पहली बार राजनीतिक नारे के रूप में इस्तेमाल हुआ। आज हर कार्यक्रम के शुभारंभ में वंदे मातरम् गीत बजाया जाना चाहिए।
इससे देशवासियों में देशभक्ति का संचार के साथ साथ कृतज्ञता का भाव जागृत होता है। जिससे देशविरोधी गतिविधियों पर पुर्ण विराम लग जायेगा। अखिल भारतीय सांस्कृतिक विकास महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष तपन घोष ने कहा कि 1950 में संविधान सभा ने इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया, स्वतंत्रता आंदोलन में यह फुसफुसाहट से नारे में बदला और जन-जन की चेतना बन गया।
देशभक्त युवा ध्रुवेन्द्र भास्कर ने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, यह भारत माता की आत्मा की अभिव्यक्ति है। इसे हम देश के परम सम्मान में गाते हैं। अपने देश को विकासशील बनाने के साथ-साथ पुन: विश्व गुरु बनाने के सपने को पर लगाते हैं।अनुप राय, किशोर ठाकुर, तुलसी प्रजापति, सुबोध कुमार सहित अन्य ने भी वंदे मातरम् गीत एवं गीतकार की प्रसंशा की।