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अंत्योदय दिवस के रूप में मन रहा 25 सितंबर

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अंत्योदय दिवस के रूप में  मन रहा 25 सितंबर
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अंत्योदय दिवस के रूप में  मन रहा 25 सितंबर

त्रिवेणी दास

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। देश आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का 110वीं जयंती समारोह अंत्योदय दिवस के रूप में  मना रहा है। पंडित जी का जन्म उत्तर प्रदेश के मथुरा जिला के नगला चंद्रभान गांव में हुआ था। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी 1952 से 1967 तक तत्कालीन भारतीय जनसंघ (वर्तमान भारतीय जनता पार्टी) के अखिल भारतीय महामंत्री रहे और एकात्मक मानववाद का सिद्धांत उनके ही विचार थे। 

भारतीय जनता पार्टी जनसंघ का ही मूल स्वरूप है। जनसंघ की स्थापना 21 अक्टूबर 1951 को नई दिल्ली में हुई थी और 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी का स्वरूप सामने आया था। भारतीय जनसंघ ने पहली बार 1951 में लोकसभा का चुनाव लड़ा और लोकसभा के कुल 489 क्षेत्र में से 15 राज्यों में 94 सीटों से चुनाव लड़ी और मात्र बंगाल में 2 और राजस्थान में 1 कुल 3 सीट ही जीत पाई।

जबकि आज की तिथि में भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक दल के रूप में स्थापित है और केंद्र में लगातार 3री बार सरकार संचालित कर रही है और देश के अधिकतम राज्यों में भाजपा की सरकार है; जबकि अटल बिहारी वाजपेई 1999 से 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे।

जनसंघ शुद्ध स्वदेशी विचारधारा वाली पार्टी थी और आज भाजपा की भी विचारधारा मूलत: वही है जहां व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा राष्ट्र की अवधारणा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेई, दत्तोपंत ठेंगड़ी, बलराज मधोक और सुंदर सिंह भंडारी के 5 सदस्यीय समिति ने 1965 में विजयवाड़ा अधिवेशन में प्रस्ताव रखा कि; भारत अपने स्वाभाविक स्वरूप में ही प्रतिष्ठा एवं सर्वांगीण विकास प्राप्त कर पाएगा।

भारत एक प्राचीनतम राष्ट्र है। भारत का अपना एक विशेष जीवनशैली, विचारधारा और सशक्त चैतन्य समाज था। अर्थ, धर्म, काम एवं मोक्ष 4 पुरुषार्थ श्रेष्ठ जीवन के अंग थे। कालांतर में विदेशी आक्रमण एवं शासन के कारण राष्ट्रीय जीवन में कई दोष उत्पन्न हो गए।

जनसंघ एवं भाजपा के भारतीयकरण तथा राष्ट्र प्रथम की अवधारणा के परिणाम स्वरूप आज भारतीय जनता पार्टी की नेतृत्व में देश के अंतिम व्यक्ति तक विकास की धारा पहुंच रही है और सरकार के अनेक जनहित के योजनाओं का लाभ सीधा व्यक्ति-व्यक्ति तक पहुंच पा रहा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जयंती के शुभ अवसर पर उन्हें नमन एवं श्रद्धा सुमन समर्पित।

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