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करमा पर्यावरण के प्रति श्रद्धा एवं प्रकृति के प्रति समर्पण का पर्व है : सुखदेव भगत

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करमा पर्यावरण के प्रति श्रद्धा एवं प्रकृति के प्रति समर्पण का पर्व है : सुखदेव भगत
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मैंना बगीचा लोहरदगा में भव्य और हर्षोल्लास के साथ मना करमा पर्व 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। नव युवक सरना समिति मैंना बगीचा लोहरदगा के तत्वावधान में करमा पूजा पूरे हर्षोल्लास एवं पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में लोहरदगा लोकसभा सांसद सह छत्तीसगढ़ प्रभारी सुखदेव भगत, लोहरदगा उपायुक्त संदीप मीणा, पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिजवी, उप विकास आयुक्त राज महेश्वरम, छत्तीसगढ़ जसपुर के पूर्व विधायक विनय भगत, एसडीओ अमित कुमार, डीएसपी श्रद्धा केरकेट्टा, समीर तिर्की, एनडीसी अभिनीत सूरज, डायरेक्टर आईटीडीए सुषमा जी, सीओ राजमोहन खलखो, दुर्गा महतो, नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष अनुपमा, युवा कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव अभिनव सिद्धार्थ सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल हुए थे। 

सर्वप्रथम पाहन ने करम वृक्ष की डाली को अखड़ा में स्थापित किया। सुकरा मास्टर के द्वारा विधिवत पूजा पाठ कराया गया। हमारी बहनों ने, जिन्होंने अपने भाई की लंबी उम्र के लिए उपवास रखी थी उन्हें  करमा धरमा की कथा सुनायी गयी। मौके पर सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि करम पर्व सिर्फ एक आदिवासी समाज का त्योहार नहीं है। यह पर्यावरण के प्रति श्रद्धा, प्रकृति के प्रति समर्पण का पर्व है। यह त्योहार प्रकृति के साथ आदिवासी संस्कृति, परंपराओं, रीति-रिवाजों और पूरे समाज की सामुदायिकता का जीवंत उदाहरण है। 

जिस करम डाली को हम काटकर लाते हैं, वही हमें प्राणवायु आॅक्सीजन देती है। उसके प्रति हमारा ऋण है, उसके प्रति हमारी श्रद्धा है। हमारे पुरखे कितने ज्ञानी थे। मानव सभ्यता में नवपाषाण क्रांति में सबसे पहले जो अन्न उपजाया गया था वह जौ था और आज भी हम करम में जौ को संजोकर रखते हैं। यही हमारी संस्कृति है, यही हमारी पहचान है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक तो है ही, साथ ही प्रकृति के संरक्षण का संदेश भी देता है।  

सांसद ने सभी को करम पर्व की हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि मैंना बगीचा में विगत कई वर्षों से  यह उत्सव भव्य रूप से मनाया जा रहा है और आगे भी इसे और भव्य बनाया जायेगा। पूजा समाप्ति के उपरांत सांसद, उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त अनेक पदाधिकारीसहित सभी गणमान्य लोगों ने करम गीतों पर पारंपरिक सामूहिक नृत्य में भाग लिया। मांदर-ढोल की थाप से पूरा मैंना बगीचा  गुंजायमान हो उठा। 

मौके पर सुखेर भगत, अब्दुल कादिर छोटू, वारिस कुरैशी, संदीप गुप्ता, शाहिद अहमद बेलू, राजेश रूद्रा, मोहन दुबे, आलोक कुमार साहू, साजिद अहमद, नेसार अहमद, कुणाल अभिषेक, मुजम्मिल अंसारी, डॉक्टर एलीन, संजय बर्मन, सुबोध साहू, संदीप पोद्दार, कमलेश कुमार, सुधीर टोप्पो, मनोज भगत, मनोज सोन तिर्की, लाल विकास नाथ शाहदेव, प्रकाश उरांव, संजीव साहु, राजू कुरैशी, सोनू कुरेशी, पवन गौतम, बाबू सिंह, अनवर अंसारी, अमर अग्रवाल, मुमताज अंसारी, रामगति साहू, गुड्डू शर्मा, उमेश साहु, त्रिपुरारी सिंह, सुदेश साहू, रामलखन साहु, संजय सिंह, सोमनाथ दत्ता, प्रतीक मोनी, दीपक विश्वकर्मा, महताब आलम सहित आयोजन समिति के पदाधिकारी, पाहन, बड़ी संख्या में माताएं-बहनें, ग्रामीण एवं श्रद्धालु उपस्थित थे।

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