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प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर है करमा परब : बिनोद कुमार रवानी

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प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर है करमा परब : बिनोद कुमार रवानी
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  • नावागढ़ में धूमधाम से मनाया गया करम परब 
  • प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर है करमा परब : बिनोद कुमार रवानी

एबीएन न्यूज नेटवर्क, नावागढ़ (धनबाद)। झारखंडी लोकसंस्कृति एवं प्रकृति आराधना के पावन पर्व करमा परब का आयोजन नावागढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों में पारंपरिक रीति-रिवाजों और हर्षोल्लास के साथ किया गया। नौ दिवसीय करम परब के दौरान करम डाली स्थापित कर जावा पूजा संपन्न की गई। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ करम देवता की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि एवं भाई-बहन के अटूट प्रेम की कामना की।

इस अवसर पर किशोरियों एवं महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में करमा गीत एवं नृत्य प्रस्तुत कर झारखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति की मनमोहक छटा बिखेरी। पर्व के दौरान प्रकृति के प्रति आस्था, पारिवारिक प्रेम, आपसी विश्वास और सामाजिक सौहार्द का सुंदर संगम देखने को मिला।

सदियों से चली आ रही इस समृद्ध परंपरा को संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह परंपरा प्रकृति के प्रति सम्मान और सामुदायिक एकजुटता की भावना को मजबूत करती है। करमा परब झारखंड की माटी, भाषा, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। 

लोकपरंपराओं की रक्षा एवं संरक्षण के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक हमारी समृद्ध विरासत सुरक्षित रूप से पहुंच सके। पर्व के समापन पर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मजबूत करने वाली परंपराओं का विधिवत निर्वहन किया गया। पूरे नावागढ़ क्षेत्र में करमा परब को लेकर उत्साह, उमंग और उल्लास का माहौल बना रहा। जय करम देवता! जय झारखंड!

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