- स्कूली बच्चों की जान से खिलवाड़
- खटारा और सीएनजी चालित अनियंत्रित ओमनी पलटी, 4 नौनिहाल घायल
एबीएन न्यूज नेटवर्क, चंदवारा (कोडरमा)। तिलैया डैम ओपी क्षेत्र अंतर्गत हरली पावर सबस्टेशन के समीप बुधवार की सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते बाल-बाल बच गया। एपीएस (भादोडीह) स्कूल के नन्हे-मुन्ने बच्चों को लेकर जा रही एक ओमनी वैन (JH 10A 4/6542) अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। इस भीषण दुर्घटना में वाहन में सवार चार मासूम बच्चे घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया।
स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए वाहन से बच्चों को बाहर निकाला और तिलैया स्थित एक निजी क्लीनिक में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज जारी है। घायलों में 8 वर्षीय अमन कुमार, 8 वर्षीया साधिका समेत दो अन्य बच्चे शामिल हैं। एक मासूम के सिर पर गंभीर चोट आई है।
लोहे के बेंच पर ठूंसे गए थे बच्चे, फिटनेस और रजिस्ट्रेशन फेल
प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त वैन न केवल अत्यंत जर्जर अवस्था में थी, बल्कि बच्चों को बैठाने के लिए उसमें लोहे के असुरक्षित बेंच ठोंके गए थे। जांच में पाया गया कि इस वाहन का रजिस्ट्रेशन और फिटनेस प्रमाण पत्र लंबे समय से फेल है। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन धड़ल्ले से इस खटारा वाहन से 8 से 10 वर्ष के छोटे बच्चों को ढो रहा था।
सीएनजी संचालित खटारा वाहन बना चलता फिरता बम
वाहन सीएनजी चालित बताया जा रहा है। जर्जर स्थिति में सीएनजी वाहन का इस तरह उपयोग करना किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पलटने के बाद वाहन में गैस रिसाव या आग लगती, तो कई मासूमों की जान जा सकती थी।
बड़ा सवाल आखिर कब जागेगा शिक्षा विभाग और प्रशासन?
इस हादसे ने निजी स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली और शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.मोटर वाहन अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्कूली वाहनों के लिए जारी दिशा-निर्देशों (जैसे- सुरक्षित सीटें, ग्रिल, स्पीड गवर्नर, वैध फिटनेस) की सरेआम धज्जियां क्यों उड़ाई जा रही हैं?
फिटनेस फेल और अवैध रूप से मॉडिफाइड वाहनों को सड़कों पर चलने की छूट किसने दी
क्या शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग से मांग की है कि दोषी स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ बंद हो सके।