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धनबाद : दिन में बैठक और विरोध, रात में कोयले की बेखौफ तस्करी!

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धनबाद : दिन में बैठक और विरोध, रात में कोयले की बेखौफ तस्करी!
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  • धनबाद : दिन में बैठक और विरोध, रात में कोयले की बेखौफ तस्करी!
  • कौन बना रहा कतरास की जनता को बेवकूफ?
  • क्या कोयलांचल का अस्तित्व अब अपने अंतिम दौर में है?

एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। कतरास  कोयलांचल की जनता से अब कुछ छिपा नहीं है। अवैध खनन और कथित कोयला तस्करी ने कतरास समेत आसपास के इलाकों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध खनन के कारण कोयले के बड़े-बड़े पिलर काटे जा रहे हैं, जिसका असर जमीन धंसने, भू-धंसान, घरों के उजड़ने और जान-माल के नुकसान के रूप में सामने आ रहा है।
इन घटनाओं के बावजूद इलाके में अवैध कोयला कारोबार और तस्करी के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि रात के अंधेरे में कोयला लदे मिनी हाइवा और अन्य वाहनों की आवाजाही होती है। 

आरोप यह भी है कि वाहनों के आवागमन के लिए रास्तों और समय को लेकर एक पूरा नेटवर्क सक्रिय है।।इसी बीच कतरास में लगातार हो रही भू-धंसान की घटनाओं को लेकर विरोध तेज हो गया है। कतरास कर्मिक मंच की बैठक में बड़ी संख्या में लोग जुटे और कतरास को बचाने का संकल्प लिया गया। 

वहीं कतरास संघर्ष मोर्चा की ओर से सीएमडी और कोयला मंत्री का पुतला दहन कर अवैध खनन बंद करने की मांग की गई। इसके बाद 24 सितंबर को कतरास बंद का आह्वान भी किया गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या केवल बैठक, विरोध और बंद से कतरास का अस्तित्व बच पाएगा?

स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल चर्चा में है कि जिस इलाके में दिन में अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठती है, उसी इलाके में रात के समय कथित तौर पर कोयला लदे वाहनों की आवाजाही कैसे जारी रहती है? लोगों का आरोप है कि रात के समय कई सड़कों पर अंधेरा रहता है और इसी दौरान कोयला ढुलाई का खेल चलता है।

ऐसे में कतरास की जनता को अब खुद भी सजग होने की जरूरत है। विरोध के साथ-साथ उन गतिविधियों पर भी नजर रखने की जरूरत है, जो कथित तौर पर रात के अंधेरे में संचालित होती हैं।कतरास को बचाने की लड़ाई सिर्फ नारों और बैठकों तक सीमित रहेगी या अवैध खनन और कथित तस्करी के खिलाफ जमीन पर ठोस कार्रवाई भी होगी—यही आने वाला समय बताएगा।

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